आईपीएल 2019: चेन्नई सुपरकिंग्स टीम की 3 कमज़ोरियां

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Author 2019-10-09 09:46:56

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चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल की मौजूदा चैंपियन है, साल 2019 के सीज़न के लिए इस टीम ने पूरी तरह तैयार कर ली हैं। चेन्नई के मालिकों ने ज़्यादातर खिलाड़ियों को रिटेन करने का फ़ैसला किया है ताकि टीम का संतुलन न बिगड़े। 23 खिलाड़ी टीम में पहले से ही थे, इसके अलावा 3 सदस्यों को शेष कर दिया गया है और 2 को शामिल किया गया है। कोच स्टीफ़न फ़्लेमिंग ने बोली लगाने वाले सदस्यों को ज़्यादा परेशान नहीं किया है। टीम में पिक गेंदबाज़ मोहित शर्मा को वापस बुलाया गया है और हुनरमंद खिलाड़ी ऋतुराज गायकवाड को शामिल किया गया है।

चेन्नई ने 3 बार आईपीएल ख़िताब पर कब्ज़ा जमाया है और साल 2019 में इनकी नज़र चौथे बार ट्रॉफ़ी हासिल करने पर है।] अगले साल ये टीम लगभग एक ही खिलाड़ी को लेकर अपने अभियान की शुरुआत करेगी जिसकी ज़रूरी पिछली बार ख़िताब जीता था। इस टीम में कई सकारात्मक पहलू हैं जो इसको मज़बूती देते हैं। फिर भी कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ ये टीम अनुकुलित नज़र आती है। यहां हम चेन्नई सुपरकिंग्स की 3 ऐसी कमज़ोरियों को लेकर चर्चा करेंगे, जिन्हें नज़रअंदाज़ करना बड़ी भूल साबित हो सकती है।


#1 टीम में अनुभवी विदेशी तेज़ गेंदबाज़ की ग़ैरमौजूदगी

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यहां हम ऐसे गेंदबाज़ की बात कर रहे हैं जो बेहद तेज़ गेंद फेंकते हैं, इसलिए इस चर्चा में हम ड्वेन ब्रावो की शामिल नहीं कर रहे हैं। चेन्नई टीम ने हाल ही में ही मार्क वुड को शेष किया है। ऐसे में धोनी की टीम में लुंगी नगीदी और डेविड विली ही विदेशी प्रतिद्वंद्वी गेंदबाज़ बचेंगे। विली को लेकर इन आशंका जताई जा रही है कि शायद वो पूरी सीज़न के लिए टीम में मौजूद नहीं रहेंगे क्योंकि वो उस वक़्त की अपनी राष्ट्रीय टीम को सेवाएं दे सकते हैं। अब ऐसे में पूरे टूर्नामेंट के लिए एक विदेशी प्रतिद्वंद्वी गेंदबाज़ पर निर्भर रहना जहां तक ​​सही होगा।


#2 टीम में युवा खिलाड़ियों की कमी

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चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाड़ियों की औसत आयु 32 साल है और इनकी बदौलत इस टीम ने कल आईपीएल ख़िताब जीता था। लेकिन क्या 2019 में भी सीनियर खिलाड़ियों का ये ग्रुप वही कमाल दिखा रहा है? ये कहना थोड़ा मुश्किल है। सुरेश रैना, हरभजन सिंह, शेन वॉटसन और ड्वेन ब्रावो अब आंतरिक क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं, ऐसे क्या ये खिलाड़ी इतनी अधिक गर्मी के मौसम में अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे?

शेन वॉटसन ने पिछले आईपीएल सीज़न के फ़ाइनल में सनराइज़र्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ एक्सप्रेस दंत'आई की थी। अब 37 साल की उम्र में वॉटसन से हर मैच में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद करना बेमानी होगा। हरभजन सिंह के साथ भी यही परेशानी है, क्योंकि वे आजकल क्रिकेट नहीं खेल रहे हैं। चेन्नई के मालिकों को टीम में कुछ युवा चेहरों को भी जगह देनी चाहिए थी जिससे उम्र का संतुलन बना रहता है।


#3 टॉप ऑर्डर में विकल्प की कमी

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चेन्नई टीम की मज़बूती में बल्लेबाज़ी का बहुत बड़ा योगदान रहा। बैटिंग की ही बदौलत ये टीम 3 बार ख़िताब अपने नाम करने में कामयाब रही है। लेकिन वर्ष 2019 में आरपीजी'आई के क्षेत्र में चेन्नई टीम को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। अगर अंबाती रायडू की बात करें तो पिछले सीज़न में उन्हें कई क्रम में आज़माया गया था। हेरफेर में रायडू ने अपनी ज़िंदा सूची बख़ूबी रखी थी। जब इस समूह में फ़ॉफ़ डुप्लेसी को शामिल किया गया, तब रायडू को निचले क्रम में भेज दिया गया था।

डुप्लेसी ने पिछले सीज़न में ज़्यादा कमाल नहीं दिखाया, यलाक प्लेऑफ़ में उन्होंने नाबाद 67 रन की मैच जिताउ पारी खेली थी। भले ही इस दक्षिण अफ्रीकी आगंतुक की की क़ाबिलियत पर शक नहीं किया जा सकता, फिर भी उनका एक बेहतर विकल्प ज़रूरी है। टीम में वॉटसन, डुप्लेसी और रायडू की जगह मुरली विजय पारी की शुरुआत कर सकते हैं। यलाकि विजय अब टी -20 के उतने प्रभावी खिलाड़ी नहीं रहे। ऐसे में चेन्नई टीम के मालिकों को शीर्ष क्रम के आगंतुक'नों का चयन करना चाहिए था।

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