उत्कृष्ट कोच के नाम पर मॉडीफाइ किए जा रहे पुराने कोच

Nai Dunia

Nai Dunia

Author 2019-10-04 10:40:01

naidunia.jagran.com

img

रेलवे यात्रा सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने व ट्रेनों को दुर्घटनारहित बनाने के लिए प्रयासरत है। जिसके लिए एलएचबी (लिंके होफमान बुश) कोच का उपयोग शुरू कर दिया गया है। उधर रेल बोर्ड ने पुराने आईसीएफ डिजाइन कोच के उत्पादन को रोकने का फैसला भी लिया है। जबकि दूसरी तरफ पश्चिम मध्य रेल जबलपुर के भोपाल स्थित निशातपुरा रेल डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना में आज भी पुराने डिब्बों का पुनर्निर्माण कर उत्कृष्ट कोच बनाकर पैसों की बर्बादी की जा रही है जबकि इसकी जगह ट्रेनों में एलएचबी कोच का उपयोग किया जा सकता है।

भोपाल की कोच फैक्टरी में आधा दर्जन उत्कृष्ट रैक तैयार किए जा रहे हैं। जिन्हें पश्चिम मध्य रेल सहित विभिन्ना ट्रेनों में लगाया जाएगा। इन ट्रेनों में वह प्रणाली नहीं जो एलएचबी कोच में है। यह डिब्बे दुर्घटनारहित नहीं है। जबलपुर की इंटरसिटी सहित अन्य ट्रेनों में हल्के पीले रंग के ये उत्कृष्ट कोच लगाए गए हैं। वहीं एलएचबी कोच लाल व सफेद रंग के बन रहे हैं जो सामान्य कोच से हल्के हैं और दुर्घटना होने पर एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते। एलएचबी कोच में सीटों की संख्या और जगह भी अधिक है।

इन ट्रेनों में एलएचबी कोचः

जबलपुर से दिल्ली जाने वाली संपर्कक्रांति, संतरागाची हमसफर, जबलपुर-अमरावती एक्सप्रेस, सोमनाथ एक्सप्रेस ट्रेन सहित पश्चिम मध्य रेल में 12 ट्रेन एलएचबी कोच के साथ चल रही हैं। जबकि जबलपुर-हबीबगंज सहित अन्य इंटरसिटी एक्सप्रेस के कुछ कोच उत्कृष्ट कोच से चल रहे हैं। नए बन रहे एलएचबी कोच में भी वहीं सुंदरता व डिजाइन दी गई है जो उत्कृष्ट कोच में बनाई जा रही है। जबकि आने वाले समय में देश भर की सभी ट्रेन एलएचबी कोच से ही चलाने की घोषणा रेलवे पहले ही कर चुका है।

पैसों की हो रही बर्बादीः

मौजूदा समय में जो पुराने कोच हो रहे हैं जिन्हे रेलवे को पूरी तरह हटा देना चाहिए उन्हें निशातपुरा कोच फैक्टरी में भेजा जा रहा है जहां रंगरोगन व पुनर्निर्माण कर उसके अंदर डिजाइन को बदलकर दोबारा पटरी पर भेज दिया जा रहा है। इसमें एक वातानुकूलित कोच की कीमत लगभग 50 लाख रुपए और बिना वातानुकूलित कोच 25 से 30 लाख रुपए में पुनर्निर्माण हो रहा है। रेल बोर्ड की मौजूदा पॉलिसी एलएचबी कोच निर्माण के साथ पुराने आईसीएफ कोच को उत्कृष्ट कोच में बदलने की भी है, जिसमें दोनों में कार्य किया जा रहा है।

वर्जन...

देश में सभी ट्रेनों को एलएचबी कोच में परिवर्तित करना निश्चित किया गया है लेकिन एलएचबी कोच की सप्लाई जल्द नहीं हो पा रही है। इसलिए रेलवे बोर्ड की पॉलिसी है कि एलएचबी के साथ पुराने आईसीएफ कोच को भी उत्कृष्ट कोच में भी परिवर्तित किया जाए।

-प्रियंका दीक्षित, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी

...बॉक्स...

विशेषज्ञ भी मान रहे सुरक्षित नहीं कोचः

मौजूदा समय में जो उत्कृष्ट कोच बनाए जा रहे हैं वे एलएचबी कोच की तरह सुरक्षित नहीं है। विशेषज्ञ भी इस बात को मान रहे हैं। निशातपुरा कोच फैक्टरी के वरिष्ठ खंड अभियंता व वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के ब्रांच अध्यक्ष मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि एलएचबी कोच की 160 से 200 किमी की रफ्तार होती है जबकि आईसीएफ कोच जिसे उत्कृष्ट के तौर पर बनाया जा रहा है वह 70 से 140 किमी की रफ्तार ही भर सकते हैं। एलएचबी कोच एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते जबकि पुराने कोच दुर्घटना के समय एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं जिससे जान-माल की ज्यादा हानि होती है। उत्कृष्ट कोच का जो पुनर्निर्माण हो रहा है वह भी ज्यादा से ज्यादा 4 या 5 वर्ष ही चल पाएंगे।

Read Source

READ SOURCE

Experience triple speed

Never miss the exciting moment of the game

DOWNLOAD