एक दौरे से भला नहीं होने वाला पाकिस्तान क्रिकेट का

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Author 2019-09-27 06:00:21

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श्रीलंका की टीम आज से पाकिस्तान में क्रिकेट दौरे की शुरुआत करने जा रही है। यह खबर इस वजह से महत्वपूर्ण है कि आज से करीब दस साल पहले श्रीलंका की टीम पर लाहौर में आतंकी हमला हुआ था। उस हमले में श्रीलंका के खिलाड़ियों समेत आईसीसी के अंपायर घायल हुए थे। आतंकियों ने श्रीलंकाई टीम की बस को तब निशाना बनाया था, जब वह लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम के रास्ते में थी। काफी देर तक टीम बस पर गोलीबारी चलती रही। इसके बाद क्रिकेट मैदान में हेलीकॉप्टर उतारकर श्रीलंकाई खिलाड़ियों को उनके वतन वापस भेजा गया। वह पूरी दुनिया में खेल के लिए काला दिन था। उसके बाद से पाकिस्तान पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ गया था। पिछले दस साल में कोई भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय टीम पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने नहीं गई। इस दौरान जिम्बाब्वे और वेस्ट इंडीज की टीमों ने एक-एक दौरा किया। श्रीलंका ने भी कुछ साल पहले लाहौर में एक मैच खेला था, लेकिन कुल मिलाकर दर्जन भर मैच पिछले दस साल में पाकिस्तान के स्टेडियमों में खेले गए। इन मुश्किल हालात के बाद आज से शुरू हो रही सीरीज में सुरक्षा से बड़़ा मसला कोई नहीं है। 

इस सीरीज में सुरक्षा कितना बड़ा मुद्दा है, इसे यूं समझा जा सकता है कि श्रीलंका के 10 स्टार खिलाड़ियों ने पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया। जिन खिलाड़ियों ने पाकिस्तान के दौरे पर जाने से इनकार कर दिया है, उनमें लसिथ मलिंगा, एंजेलो मैथ्यूज, कुसल परेरा, तिसारा परेरा, सुरंगा लकमल और दिनेश चांदीमल जैसे बडे़ नाम शामिल हैं। ऐसे में, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने नई टीम का एलान किया। इसमें ज्यादातर नए खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। नई टीम मंगलवार को कराची पहुंची है। श्रीलंकाई टीम के पहुंचने के बाद पाकिस्तान का कराची शहर छावनी में तब्दील हो चुका है। आज से 2 अक्तूबर तक, जब तक कि खिलाड़ी लाहौर के लिए नहीं रवाना होते, कराची की सड़कें सूनी रहेंगी। ऐसा माहौल तब भी था, जब 2004 में भारतीय टीम ने पाकिस्तान का दौरा किया था। 5 अक्तूबर से यही चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था लाहौर में दिखाई देगी। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक काम सोच-समझकर किया है कि इस सीरीज के आयोजन के लिए सिर्फ दो शहरों को चुना है, ताकि खिलाड़ियों की आवाजाही एक सीमित दायरे में रहे। 

हालांकि पाकिस्तान के लिए यह मुस्तैदी किसी एक देश के खिलाड़ियों की सुरक्षा भर की नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में खेलों के अस्तित्व से जुड़ी है। अगर इस बार छोटी सी भी लापरवाही हुई, तो फिर पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का नामोनिशां खत्म हो जाएगा। चूंकि पाकिस्तान में भी क्रिकेट के चाहने वाले करोड़ों में हैं, इसलिए सबसे ज्यादा असर क्रिकेट पर ही पडे़गा। पिछले दिनों इस मामले में एक दिलचस्प मोड़ और आया। पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद आफरीदी ने यह हो-हल्ला मचाया कि बीसीसीआई और आईपीएल मालिकों ने श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर पाकिस्तान में न खेलने का दबाव बनाया है। आईपीएल मालिकों ने श्रीलंकाई खिलाड़ियों को चेतावनी दी है कि अगर वे पाकिस्तान में खेलेंगे, तो उन्हें आईपीएल का करार नहीं दिया जाएगा। हालांकि आफरीदी की यह बात उसी वक्त बेसिर-पैर की साबित हुई, जब पता चला कि इस टीम में पाकिस्तान जाने से मना करने वाले खिलाडि़यों में सिर्फ लसिथ मलिंगा के पास ही आईपीएल का करार है। 

श्रीलंका के पिछले अनुभव को देखते हुए उसका फिर से पाकिस्तान जाकर खेलने के तैयार हो जाना सभी के लिए हैरत का मुद्दा है। इसके कई कारण गिनाए जा रहे हैं, जिनमें एक यह भी है कि श्रीलंका के क्रिकेट बोर्ड की हालत काफी खस्ता है और वह ऐसे किसी ऑफर को ठुकराने की स्थिति में नहीं है। एक कारण और भी बताया जाता है कि एक समय जब श्रीलंका में अतिवादी हिंसा बहुत ज्यादा थी, तब दुनिया की तमाम टीमों ने वहां जाने से इनकार कर दिया था। ऐसे में, भारत और पाकिस्तान ने वहां जाकर क्रिकेट खेलने का जोखिम लिया था। इसलिए यह भी कहा जा सकता है कि श्रीलंका उसी एहसान का बदला चुका रहा है। लेकिन यह भी तय है कि अगर यह दौरा शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो भी जाएगा, तब भी यह उम्मीद कतई नहीं है कि बाकी दुनिया की टीमें पाकिस्तान जाना शुरू कर देंगी।  

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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