एक पूर्व कप्तान से भारतीय क्रिकेट को बहुत उम्मीदें

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Author 2019-10-31 05:27:02

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खेल प्रशासक राजनीतिक नेताओं की तरह चुनाव पूर्व घोषणापत्र जारी नहीं करते, वे चुनाव लड़ते हैं और उसके बाद ही सामने जो काम आता है, उसे अंजाम देते हैं। बीसीसीआई के नए अध्यक्ष सौरव गांगुली ने सप्ताह भर पहले नया काम संभाला है। टी-10 तरह की पारी खेलते हुए बैठक, प्रेस इंटरव्यू और अपने अभिनंदन कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। वह अपनी चुनौतियों के बारे में पहले ही बोल चुके हैं : आम स्थिति बहाल करना, आपातकाल-सी स्थिति समाप्त करना, डे-नाइट टेस्ट कराना, आईसीसी से राजस्व साझा करना, प्रथम श्रेणी क्रिकेट और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी का विकास और दर्शकों को वापस स्टेडियम लाना। गांगुली के सामने जरूरी कामों की एक विकट सूची है और उन्होंने संकेत दिए हैं कि गहरे बदलाव आसन्न हैं। 

जब उन्होंने कहा कि विराट कोहली भारतीय क्रिकेट में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, तब यह एक  भारतीय कप्तान की दूसरे भारतीय कप्तान के लिए कोई आम भावना नहीं थी। इसका अर्थ है, गांगुली खिलाड़ियों का पक्ष लेंगे और बताएंगे कि कप्तान वरीयता क्रम में एक विशेष स्थान रखता है। उम्मीद है, गांगुली इस सोच को अपनाने के लिए बीसीसीआई को भी तैयार करेंगे। इसी तरह से चैंपियन महेंद्र सिंह धौनी के बारे में दी गई उनकी सलाह महत्वपूर्ण है कि जो विशेष हैं, उनके साथ विशेष व्यवहार भी होना चाहिए।  

सम्मान से विपरीत भारतीय क्रिकेट की सेवा करने वालों को कई बार परेशान और अपमानित भी किया गया। प्रत्यक्ष रूप से अनिल कुंबले के साथ क्या किया गया था? परोक्ष रूप से राहुल द्रविड़ और जाहिर खान जैसे खिलाड़ियों के साथ क्या किया गया था, भारतीय क्रिकेट के ये बहुत शर्मनाक अध्याय हैं। गांगुली के रहते ऐसी बातें अतीत हो जाएंगी।  

सम्मान की शृंखला राज्य क्रिकेट संघों और प्रथम श्रेणी के क्रिकेटरों तक पहुंचनी चाहिए। घरेलू क्रिकेट के सितारों- अमोल मजूमदार, सितांशु कोटक, विनीत सक्सेना, रजत भाटिया इत्यादि की भी पूछ-परख होनी चाहिए। 20-20 साल के करियर के बावजूद इन खिलाड़ियों के अनुभव को बेकार होने दिया गया है। भारत की समृद्ध संस्कृति के बावजूद भारतीय क्रिकेट द्वारा खिलाड़ियों का असम्मान दुर्भाग्यपूर्ण है। बड़े खिलाड़ियों की जिंदगी में भी शोहरत, प्यार और पैसे बरसते हैं, लेकिन जल्दी ही सब गायब हो जाते हैं। लोग खिलाड़ियों को उठाते हैं और गिरा भी देते हैं। तेंदुलकर, कोहली और उनके पहले गावस्कर, कपिल देव भारतीय क्रिकेट के स्थाई हीरो हैं। धौनी भी इसी श्रेणी के खिलाड़ी हैं।

ऐसा नहीं है कि भारत अपने खेल नायकों का सम्मान नहीं करता है। तेंदुलकर राज्यसभा के लिए मनोनीत किए गए और भारत रत्न हैं। अन्य खिलाड़ियों को भी विशिष्ट नागरिक सम्मान और सरकारी खेल पुरस्कार मिलते ही रहे हैं। बीसीसीआई बड़े खिलाड़ियों के नाम पर आयोजन कराती है। रणजी, सीके नायडू, विजय मर्चेंट, विजय हजारे और वीनू मांकड़ की याद में टूर्नामेंट कराती है। भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट गावस्कर-बॉर्डर ट्रॉफी नाम से खेला जाता है। कपिल के नाम पर ड्रेसिंग रूम  हैं और अतीत व वर्तमान के अनेक खिलाड़ियों के नाम से क्रिकेट स्टेडियम के स्टैंड हैं। राहुल द्रविड़ के नाम पर एम चिन्नास्वामी स्टेडियम की एक दीवार है। बेंगलुरु में प्रसन्ना और कुंबले के नाम से सड़कें हैं। बीसीसीआई हर साल पटौदी व्याख्यान आयोजित करती है। उमरीगर और अन्य दिग्गजों के नाम से पुरस्कार समारोह होते हैं, लेकिन सच्चा सम्मान इस प्रतीकवाद से आगे है। 

आईसीसी में हॉल ऑफ फेम है और वर्तमान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी अपना वार्षिक विजेता चुनने के लिए मतदान करते हैं। ऑस्ट्रेलिया के खेल प्रशासन में खिलाड़ियों की स्थिति मजबूत है। ऐसी मजबूत क्रिकेट परंपराओं को स्थापित करने में भारत को समय लगेगा। एक क्रिकेट संग्रहालय बनाने की कई बार चर्चा होती है, मगा अभी तक शुरुआत नहीं हुई है। अभी सिर्फ सीसीआई, मुंबई है, जो भारतीय क्रिकेट पर पर्याप्त रोशनी डालती है। गांगुली, बृजेश पटेल व अशोक मल्होत्रा जैसे पूर्व खिलाड़ी प्रमुख पदों पर हैं और राज्य संघों में भी पूर्व खिलाड़ियों की तैनाती है। सबने मिलकर खेल के एक सिरे को बदल दिया है। अब समय आ गया है, ये खिलाड़ी प्रशासक खेल में अपना नया योगदान दें। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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