एक मैराथन जिसने मैदान की बड़ी बाधा को तोड़ दिया

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Author 2019-10-18 03:37:16

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कहा जाता है कि रिकॉर्ड टूटने के लिए ही होते हैं और वह समय-समय पर टूटते भी रहते हैं। पर खेलों में कुछ बैरियर ऐसे होते हैं, जिनको पार करने वाले खिलाड़ियों का नाम इतिहास में दर्ज हो जाता है और इन रिकॉर्डों का एक अलग ही महत्व होता है। इस कारण इन बैरियर को तोड़ने के लिए खिलाड़ी में जबर्दस्त क्षमता के साथ उसका मानसिक रूप से मजबूत होना भी बेहद जरूरी है। ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं केन्या के मैराथनर इलियुड किपचोगे। उन्होंने पहली बार दो घंटे के कम समय में मैराथन पूरी करने में कामयाबी हासिल की है। उन्होंने विएना मैराथन में 1.59 घंटे और 40.2 सेकंड का समय निकाला। हालांकि कुछ तकनीकी कारणों से इस प्रदर्शन को विश्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया है, लेकिन इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता। मैराथन का नया विश्व रिकॉर्ड तो आखिरकार बन ही गया है।

किपचोगे का यह प्रदर्शन उस तरह का ही है, जैसे कि कुछ दशकों पहले 100 मीटर दौड़ में 10 सेकंड से कम का समय निकालना, वनडे क्रिकेट में दोहरा शतक जमाना। यह माना जाता है कि मानव का स्वभाव हमेशा प्रगति करना रहा है, इसलिए मानवीय क्षमताओं से परे दिखने वाले प्रदर्शनों को करके यह दिखाता रहा है कि प्रयास करने पर कुछ भी असंभव नहीं है। यह भी दिलचस्प है कि किसी भी खेल में बैरियर माने जाने वाले प्रदर्शन को कोई एक बार पार कर लेता है, तो खिलाड़ियों को लगने लगता है कि इस प्रदर्शन को दोहराना असंभव नहीं है। फिर, कई खिलाड़ी उस प्रदर्शन को दोहराने में कामयाब हो जाते हैं। 100 मीटर दौड़ में 1975 में क्यूबा के धावक सिल्बियो लियोनार्ड का 10 सेकंड का बैरियर तोड़ना और सचिन तेंदुलकर का 2010 में वनडे क्रिकेट में पहला दोहरा शतक जमाना इसके अच्छे उदाहरण हैं।  

एथलेटिक्स में 100 मीटर दौड़ में लियोनार्ड के 10 सेकंड का बैरियर पार करने से पहले ज्यादातर एथलीट 10.4 सेकंड के आसपास का समय निकाल रहे थे। लेकिन एक बार 10 सेकंड की बाधा पार होते ही एक के बाद एक इससे भी बेहतर प्रदर्शन होने लगे। बेन जॉनसन ने 1987 में पहली बार 9.83 सेकंड का समय निकाला, तो लगने लगा कि इससे बेहतर प्रदर्शन करना शायद ही संभव हो पाए। पर उसैन बोल्ट इस रिकॉर्ड को 9.58 सेकंड तक ले गए। यह विश्व रिकॉर्ड उन्होंने 16 अगस्त, 2009 को बर्लिन में बनाया। लेकिन बोल्ट के इस प्रदर्शन के बाद इस दौड़ में 9.50 सेकंड को बैरियर माना जा रहा है। लेकिन एक न एक दिन कोई इसे तोड़ने में जरूर सफल हो जाएगा।

इसी तरह 2010 में ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए मैच में वनडे क्रिकेट के इतिहास का पहला दोहरा शतक जमाया गया। इसके बाद क्रिकेटरों की समझ में आ गया कि दोहरा शतक भी लगाया जा सकता है। इस सोच की वजह से ही रोहित शर्मा के बल्ले से तीन दोहरे शतक लग गए। इसके अलावा विरेंदर सहवाग,  मार्टिन गप्टिल और कमर जमां ने दोहरे शतक जमाए। रोहित शर्मा का एक दोहरा शतक तो 264 रन का है। इस पारी के बाद ही यह महसूस किया जाने लगा कि वनडे क्रिकेट में तिहरा शतक भी संभव है। हालांकि अब तक वहां तक कोई नहीं पहुंच सका है। 

इसी के साथ अब क्रिकेट प्रेमियों को ट्वंटी-20 क्रिकेट में भी दोहरा शतक का इंतजार है, तो वनडे क्रिकेट में तिहरे शतक का इंतजार है। अभी टी-20 में क्रिस गेल के नाम 175 रनों का रिकॉर्ड है और आरोन फिंच भी 172 रन तक पहुंच चुके हैं। यह अब साफ तौर पर दिखने लगा है कि किसी भी दिन उच्चक्रम में धाकड़ अंदाज में खेलने वाले बल्लेबाज के बल्ले से वनडे मैच में तिहरा शतक और टी-20 में दोहरा शतक निकल सकता है। 

किपचोगे भी मैराथन में दो घंटे का बैरियर तोड़ने के प्रयास में कुछ साल से लगे हुए थे। वह दो साल पहले यानी 2017 में विएना मैराथन में ही इसके करीब पहुंचे। उन्होंने दो घंटा और 25 सेकंड का समय निकाला। समय के साथ खिलाड़ियों के प्रदर्शन में कितना बदलाव आता है, इसे इस तरह समझ सकते हैं कि मैराथन में 1910 में पहला विश्व रिकॉर्ड 02:42:01 का था। मैराथन के विश्व रिकॉर्ड में लगातार सुधार होता गया और यह 2018 में 02:01:39 तक पहुंच गया। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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