ऐथलेटिक्स में कब खत्म होगा पदकों का सूखा

Navbharat Times

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Author 2019-10-14 11:52:00

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लेखक: मनोज चतुर्वेदी

पिछले कुछ वर्षों में क्रिकेट के अलावा अन्य कई खेलों में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अब कई खेलों में हमारे देश से विश्व चैंपियन निकलने लगे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से इसमें ऐथलेटिक्स शुमार नहीं हो सका है। ऐथलेटिक्स में विश्व चैंपियन निकलना तो दूर, हम विश्व चैंपियनशिप में पिछले 16 सालों से पदक तक नहीं जीत सके हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे एथलीटों ने कभी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नहीं बंधाई है। जकार्ता में हुए पिछले एशियाई खेलों में आठ स्वर्ण सहित 20 पदक जीतने से लगा था कि अब विश्व ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में 2003 के बाद से चला आ रहा पदकों का सूखा शायद खत्म हो जाए, लेकिन दोहा में पिछले दिनों समाप्त हुई आईएएएफ विश्व ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में हमें कोई मेडल नहीं मिल सका।

विदेश में प्रशिक्षण बिना पदक के भारतीय दल के लौटने के बावजूद इस बात को लेकर गंभीर चर्चा नहीं हो रही है कि एथलीटों का प्रदर्शन कैसे सुधारा जाए। ऐसा लगता है जैसे हमारे अधिकारी मानकर चल रहे हों कि हमारे एथलीट मेडल के लायक हैं ही नहीं। पिछली चैंपियनशिप से बेहतर प्रदर्शन संतोष की बात हो सकती है लेकिन पदक के बिना लौटना ठीक तो नहीं कहा जा सकता है, वह भी एथलीटों को तैयारी के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के बाद। अब एथलीटों को विदेशों में भाग लेने का भरपूर अवसर उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा विदेश में प्रशिक्षण की सुविधा भी मुहैया कराई जाती है। ऐसे में खाली हाथ लौटना खलता है। दो साल पहले यानी 2017 की लंदन विश्व चैंपियनशिप में भारतीय दल के जेवेलिन थ्रोअर देविंदर सिंह कांग ही फाइनल में जगह बना सके थे। लेकिन इस बार भारत ने तीन स्पर्धाओं के फाइनल में स्थान बनाया और दो स्पर्धाओं के एथलीटों ने अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलिंपिक खेलों के लिए क्वॉलिफाई किया। यह प्रदर्शन निश्चय ही दो साल पहले के प्रदर्शन से बेहतर कहा जाएगा पर इतने भर से काम नहीं चलने वाला।

img सेना में सेवारत अविनाश साबले ने पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज में फाइनल तक पहुंचकर सभी को हतप्रभ कर दिया। उन्होंने फाइनल तक पहुंचने के दौरान दो बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड को ध्वस्त किया। अविनाश ने कहा कि मैं जानता था इस चैंपियनशिप के पोडियम पर चढ़ना लगभग असंभव है, इसलिए मेरा फोकस टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने पर था। वह फाइनल में स्थान बनाने के दौरान दो बार राष्ट्रीय रेकॉर्ड बनाकर टोक्यो का टिकट कटाने में सफल रहे। उन्होंने पहले हीट में 8:25.23 मिनट का और फिर फाइनल में 8:21.37 मिनट का राष्ट्रीय रेकॉर्ड बनाया। अविनाश ने जता दिया है कि वह अब ओलिंपिक के लिए जमकर मेहनत करने वाले हैं और उसमें पदक का सपना साकार कर सकते हैं। वहीं महिला जेवेलिन थ्रोअर अन्नु रानी ने फाइनल तक पहुंचकर अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि ओलिंपिक का टिकट कटाने में वह सफल नहीं हो सकीं लेकिन उनके लिए अभी मौके हैं। इसलिए उन्हें तैयारी के लिए भरपूर सुविधाएं देने की जरूरत है।

भारत के लिए एकमात्र कांस्य पदक अंजू बॉबी जॉर्ज ने 2003 की विश्व चैंपियनशिप की लंबी कूद में जीता था। हालांकि वह अपने इस प्रदर्शन को एक साल बाद यानी 2004 के एथेंस ओलिंपिक में नहीं दोहरा सकी थीं। पिछले कुछ सालों में एशियाई खेलों और फिर कॉमनवेल्थ खेलों में जेवेलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा, स्प्रिंटर दुती चंद, 400 मीटर दौड़ की धाविका हिमा दास और रिले टीमों के एथलीटों के उभरने पर लगने लगा था कि शायद अब विश्व ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदकों का सूखा खत्म हो जाएगा। पर स्प्रिंटर दुती चंद आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकीं। वहीं नीरज चोपड़ा और हिमा दास अनफिट होने की वजह से भाग ही नहीं ले सके। नीरज चोपड़ा ने 2018 में एशियाई खेलों में 88.06 मीटर जेवेलिन फेंककर स्वर्ण पदक जीता था, वहीं दोहा में विश्व ऐथलेटिक्स में जर्मनी के एंडरसन पीटर्स ने 86.89 मीटर जेवेलिन थ्रो करके स्वर्ण पदक जीता। इससे लगता है कि नीरज चोपड़ा यदि फिट होकर इस चैंपियनशिप में भाग लेते तो स्वर्ण पदक जीत सकते थे। नीरज इस साल दो मई को दाहिनी कोहनी की सर्जरी के कारण चार माह अभ्यास से दूर रहने के बाद फिर से अभ्यास तो शुरू कर चुके हैं पर अभी पूरी तरह से फिट नहीं हो सके हैं। जहां तक हिमा दास की बात है, तो उनसे भी खासी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। उन्होंने इस साल जून-जुलाई में चार माह तक यूरोप में ट्रेनिंग की थी। इस दौरान उन्होंने पांच अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिपों में स्वर्ण पदक जीता। लेकिन इस दौरान वह एक बार भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहराने में सफल नहीं हो सकीं।

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वह विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वॉलिफाई नहीं कर सकीं। उन्हें रिले टीम में रखा गया पर वह पीठ में तकलीफ की वजह से टीम में शामिल होने की दौड़ से हट गई। दुती चंद ने विश्व चैंपियनशिप की 100 मीटर दौड़ में 11.48 सेकेंड का समय लिया और वह हीट में सातवें स्थान पर रहीं। इस दौड़ का स्वर्ण पदक जीतने वाली तायमीर बार्नेट ने 10.23 सेकेंड का समय लिया। पर दुती ने राष्ट्रीय ओपन ऐथलेटिक्स चैंपियनशिप में 11.22 सेकेंड का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर संकेत दिया है कि उनमें सुधार की अभी भी संभावनाएं हैं। लेकिन अभी एक सेकेंड का सुधार करके ही पदक जीतने की उम्मीद कर सकती हैं।

दिग्गजों की पहलभारतीय ऐथलेटिक्स फेडरेशन के प्रयासों से प्रदर्शन का स्तर तो सुधरता दिख रहा है पर आशातीत परिणाम सामने नहीं आ सके हैं। पीटी उषा पहले से अपनी अकैडमी चला रही हैं और अब अंजू बॉबी जॉर्ज ने भी अकैडमी खोलकर प्रशिक्षण देने की शुरुआत की है। पूर्व दिग्गजों के प्रशिक्षण से जुड़ने से भविष्य में चैंपियन निकलने की उम्मीद की जा सकती है।

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