ओरछा को सर्वश्रेष्ठ हेरिटेज सिटी का राष्ट्रीय अवार्ड

Amar Ujala

Amar Ujala

Author 2019-09-28 02:51:25

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ओरछा (झांसी)। विश्व पर्यटन दिवस पर उप राष्ट्रपति वैंकया नायडू ने बुंदेलखंड की प्राचीन नगरी ओरछा को सर्वश्रेष्ठ हेरिटेज सिटी के अवार्ड से नवाजा है। यह पुरस्कार विज्ञान भवन दिल्ली में आयोजित कार्यक्त्रस्म में मध्यप्रदेश पर्यटन सचिव फैज अहमद किदवई को दिया गया। ओरछा के अलावा नौ अन्य स्थलों को भी अलग.अलग श्रेणियों में इस राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया है।
मध्यप्रदेश पर्यटन को पर्यटन की श्रेणी में किए गए विभिन्न कार्यों के लिए विभिन्न श्रेणियों में कुल 10 राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। समारोह में केन्द्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल तथा संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन के महासचिव झुरब पोलीकैश भी मौजूद रहे। राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार समारोह में 2019 के अवार्ड प्रदान किए गए। विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिए गए राष्ट्रीय पुरस्कारों में बेस्ट एडवेन्चर स्टेट यसर्वश्रेष्ठ साहसिक राज्य। विदेशी भाषा में प्रकाशन में उत्कृष्टता चाइनीस ब्रोशर। सर्वश्रेष्ठ पर्यटन संवर्धन प्रचार सामग्री लोनली प्लैनेट पॉकेट गाइड । सर्वश्रेष्ठ हेरिटेज सिटी ओरछा। सर्वश्रेष्ठ स्मारकण् बौद्ध स्मारक सांची। बेस्ट वाइल्ड लाइफ गाइड मनोज कुमार पन्ना। सर्वश्रेष्ठ हवाई अड्डा इंदौर। स्वच्छता पुरस्कारण् इंदौर। सर्वश्रेष्ठ पर्यटक परिवहन ऑपरेटर रेडिएंट ट्रेवल। इस अवसर पर श्री फैज़ अहमद किदवई सचिव मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग ने कहा यह हमारे लिए गौरव का विषय है कि मध्य प्रदेश पर्यटन को इस बार भी विभिन्न श्रेणियों में कुल 10 राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
विरासत की नगरी में राजा के रूप में पूजे जाते हैं राम
ओरछा में रामराजा का एक मात्र मंदिर ऐसा है जहां भक्त और भगवान के बीच राजा और प्रजा का रिश्ता है। रोजाना इस मंदिर में हजारोँ की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर राजा के दरवार में हाजरी लगाते है तो वही विदेशी पर्यटक मंदिर की भव्यता और
दिव्यता के बारे में जानने की जिज्ञासा लेकर आते हैं। इस मंदिर में ओरछा की रानी महारानी कुंवरि गणेश भगवान राम को बाल रूप में अयोध्या से ओरछा लाई थीं। भगवान यहाँ राजा के रूप विराजमान है इसलिए भगवान राम का रोज लगने वाला राज भोग का प्रसाद राजसी वैभव के प्रतीक इत्र व पान का प्रसाद मंदिर के अंदर जरूर मिलता है। यहां तीन हर की आरती में भगवान के पुलिस द्वारा सशस्त्र सलामी दी जाती है।
जहांगीर महल
ओरछा का जहांगीर महल हिन्दू मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल है। सोलहवीं शताब्दी में निर्मित इस महल में हिन्दू व मुग़ल वास्तुकला का मिला जुला प्रयोग है ।इसके मुख्य द्वार पर भगवान गणेश के प्रतीक चिन्ह पाषाण के हाथियों को देखकर हिन्दू सैलानियों का सर श्रद्धा से झुक जाता है तो वही हाथियों के नीचे बनी कुरान की आयातों के चौकोर प्रतीक चिन्ह को देखकर मुस्लिम पर्यटक सिजदे में झुक जाते हैं ।। इन्हीं महलो के पास है रायप्रवीण महल यहाँ की वाल पेंटिंग और इतिहास को जानने की जिज्ञासा पर्यटकों इस महल की ओर खींचती है । रायप्रवीण ओरछा दरबार की राज नर्तकी और रीतिकाल के महाकवि केशव की शिष्या होने के साथ ओरछा के राजा इंद्रजीत की प्रेयसी भी थी। इनके प्रेम की पराकाष्ठा इस महल में आज भी विद्यमान है जो पर्यटकों बरबस ही यहाँ खीच लाती है। आगरा तख्त के शहंशाह अकबर ने रायप्रवीण के नृत्य और काव्य कौशल की चर्चा सुन उसे ओरछा से आगरा दरबार में जबरन बुलाया यह जानते हुए भी कि रायप्रवीण ओरछा के महाराज इंद्रजीत की प्रेयसी भी है तो राय प्रवीण ने अपने काव्य कौशल से अकबर को विवश कर दिया कि वह उसे वापिस ओरछा भेजें। राय प्रवीण ने आगरा दरबार में पहुंचकर कहा की विनती राय प्रवीण की सुनिए शाह सुजान झूठी पातर भकत है बारी बायस स्वान इसका मतलब है मेरी एक अर्ज है शहंशाह जिसे सुन ले मैं एक झूठी पत्तल के सामान हूँ जिसका भरण बारी जाति का व्यक्तिए बायस यानि कौआ या फि र स्वान यानी कुत्ता कर सकता है। आप इनमे से कोई एक भी है तो आप मेरा वरण कर सकते है रायप्रवीण के काव्य कौशल को देखकर अकबर ने उसे दोबार ससम्मान ओरछा दरबार भेज दिया। तब से रायप्रवीण के इस ओरछा स्थित महल में इंद्रजीत और उनके अमिट प्रेम की कहानी पर्यटकों को इस महल की और आकृष्ट करती है
लक्ष्मी मंदिर
ओरछा का लक्ष्मी मंदिर पर्यटकों के लिए बेहद ख़ास है। समृद्धि की देवी लक्ष्मी को समर्पित इस मंदिर में वास्तुकला का समन्वित रूप दिखाई पड़ता है। मंदिर की दीवारें गरुण पक्षी का आकार बनाती हैं। गरुण विष्णु भगवान का वाहन है और लक्ष्मी
जी उनकी पत्नी हैं इसलिए लक्ष्मी मंदिर को गरुण पक्षी की तरह बनाया गया है। यह मंदिर ओरछा के निचले तल से 100 फुट ऊपर है पहाड़ी पर बना है मंदिर में पूर्ण रूप से तांत्रिक प्रभाव है इसके सभी आँगन एक दूसरे को जोड़कर देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले श्री यंत्र की आकृति बनाते है।
आकर्षित करता नेचर रिजर्व व राफ्टिंग
ओरछा में पर्यटकों को न केवल भव्य मंदिर व महल दिखाई पड़ते है बल्कि नेचर रिज़र्व में इको टूरिज़म को विकसित करने के लिए बेतवा नदी के किनारे पहाड़ियों पर बनाए गए इको पॉइन्ट पर बेतवा के साथ साथ समग्र वनांचली को देख सैलानी गदगद हो उठते हैं। नेचर में कई वन्य प्राणी भी है जिन्हें देखने पर्यटकों को जंगल सफ ारी करना पड़ती है। पचमढ़ी पर बेतवा नदी की दो धाराओं के बीच टापू पर बना महल एवं मौकम हनुमान मंदिर की पहाड़ी से गिरता पानी सैलानियों को अभिभूत कर देता है ।बेतवा की गिरती उठती धारा के बीच जब देशी विदेशी पर्यटक राफ्टिंग करने निकलते है तो रोमांचित होने लगते है ।

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