कंधे की चोट के चलते मैदान से पूरा साल दूर रहा : नीरज चोपड़ा

Amar Ujala

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Author 2019-09-15 04:42:03

चंडीगढ़। एक साल से मैदान से दूर रहा हूं। इससे कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताएं मेरे हाथ से निकल गईं। इस बात का मुझे मलाल है, लेकिन अब अभ्यास शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि ओलंपिक से पहले होने वाले ट्रायल में बेहतर कर टीम इंडिया का हिस्सा बनूंगा। यह कहना है अर्जुन अवार्डी नीरज चोपड़ा का। वह शनिवार को डीएवी कालेज सेक्टर 10 में क्रिकेट एकेडमी की ओपनिंग में पहुंचे। एकेडमी की कमान पूर्व क्रिकेटर और युवराज सिंह के पिता योगराज को सौंपी गई है। सिटी के पूर्व क्रिकेटर, डीएवी कॉलेज के प्रिंसिपल, स्टूडेंट्स भी मौजूद रहे।
कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में भारत को जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल दिला चुके नीरज चोपड़ा ने बताया कि कुछ महीनाें पहले बाएं एल्बो में इंजरी हो गई थी। इसके बाद मेरा आपरेशन भी हुआ। कंधे की सर्जरी होने के बाद मैंने ज्यादा बेड रेस्ट नहीं किया। बीच-बीच में एक्सरसाइज करता रहता था। साथ ही साइक्लिंग भी शुरू कर थी। लगभग एक साल ग्राउंड से दूर रहा।
नीरज ने बताया कि इस दौरान कई बड़ी प्रतियोगिताएं मेरे हाथ से निकल गईं। पहले एशियन गेम्स, इसके बाद एथलेटिक्स लीग भी निकल गई। सितंबर के आखिर में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप भी मेरे हाथों से निकल रही है। नीरज ने बताया कि ओलंपिक मेरा अगला टारगेट है। ओलंपिक से पहले इसी साल के आखिर में होने वाले नेशनल में हिस्सा लेना चाहता हूं। नीरज चोपड़ा ने बताया कि हल्का हल्का अभ्यास कर रहा हूं। अब पटियाला आ गया हूं। डॉक्टर की सलाह के बाद बहुत जल्द फुल प्रैक्टिस शुरू कर दूंगा। नीरज ने गोल्फ बॉल थ्रो के बारे में बताया कि इस तकनीक को विदेश एथलीट अपनाते हैं। इससे स्टेमिना बढ़ता है।
नीरज चोपड़ा ने बताया कि जब भी वह मैदान पर उतरते हैं तो किसी रिकार्ड को तोड़ने या बनाने की बात नहीं सोचते। बस मैदान पर अपना सौ प्रतिशत देने की तैयारी से उतरते हैं। नीरज ने कहा जेवलियन थ्रो में आज विश्व में जर्मनी पहले स्थान पर है और भारत दूसरे। भारत के पास बेहतरीन और युवा जैवलिन थ्रो के खिलाड़ी उभर कर समाने आ रहे हैं। इनमें रोहित, मोहित जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि कि अगले साल जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में ये खिलाड़ी देश का नाम रोशन करेंगे।
डीएवी कॉलेज में क्रिकेट कोचिंग सेंटर की कमान पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह को मिली है। योगराज सिंह और युवराज सिंह डीएवी कॉलेज से ही पढ़े और क्रिकेट खेले हैं। योगराज सिंह कई साल पहले भी इसी कॉलेज में कोचिंग देते थे। अब एक बार फिर से उन्हें युवा क्रिकेटर्स को तराशने की कमान दी गई है। योगराज सिंह ने कहा कि वह डीएवी कॉलेज को बुलंदियाें पर देखना चाहते हैं और यहां से देश के भावी क्रिकेटर्स को उभारना चाहेंगे।

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