कप्तानी के मिथक को तोड़ता एक विराट बल्लेबाज

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Author 2019-10-15 02:49:36

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विराट कोहली रिकॉर्ड्स के शिखर पर बैठे हैं। बावजूद इसके उन्हें रिकॉर्ड बुक के हर पन्ने पर अपने नाम को देखने का लालच नहीं। पिछले कुछ समय से उनमें जो धैर्य दिखा है, वह हैरान करने वाला है। अब हर मैच में वह ज्यादा परिपक्व दिखाई देते हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के दौरान उन्होंने अभी तक जितने भी फैसले किए हैं, वे लाजवाब रहे। किसी मास्टरस्ट्रोक की तरह। उन्होंने केएल राहुल और ऋषभ पंत की जगह रोहित शर्मा और ऋद्धिमान साहा को जगह दी। रोहित शर्मा ने पहले टेस्ट मैच में अपनी बल्लेबाजी से और साहा ने अपनी विकेटकीपिंग से इस फैसले को सही साबित किया। विशाखापट्टनम टेस्ट मैच में विराट कोहली ने दक्षिण अफ्रीका को 400 से भी कम रनों का लक्ष्य देकर बल्लेबाजी के लिए उतार दिया। यह जानते हुए भी इसी टीम ने इसी टेस्ट मैच में पहली पारी में सवा चार सौ से ज्यादा रन बनाए थे। 

लेकिन विराट कोहली की ‘कैलकुलेशन’ बिल्कुल ठीक थी। उन्हें पता था कि चौथी पारी में जीत हासिल करने के लिए इतने रन काफी हैं। वह अपने गेंदबाजों को ज्यादा से ज्यादा ओवर देना चाहते थे। पुणे टेस्ट मैच में उन्होंने हनुमा विहारी को प्लेइंग 11 से बाहर बिठाया। वह उमेश यादव को टीम में लेकर आए। उमेश यादव ने पुणे टेस्ट में छह विकेट लेकर अपने कप्तान के फैसले को सही साबित किया। 

इसके अलावा विराट कोहली ने पहली पारी में तिहरे शतक का शानदार मौका छोड़ दिया। विराट ने जब पुणे में पारी समाप्ति का एलान किया, तो वह 254 रनों पर खेल रहे थे। दोहरे शतक के बाद के रन उन्होंने जिस रफ्तार से बनाए थे, उससे तय था कि तिहरा शतक लगाने के लिए उन्हें कुछ ही ओवर और बल्लेबाजी करनी पड़ती। बड़ी बात यह है कि वह रवींद्र जडेजा के शतक का तो इंतजार कर रहे थे, पर अपने तिहरे शतक के लिए उन्होंने एक गेंद भी इंतजार नहीं किया। जडेजा जैसे ही आउट हुए, उन्होंने पारी समाप्ति का एलान कर दिया। 

करीब दो साल पहले विराट कोहली ने ही कहा था कि टीम में वह भावना आ गई है कि व्यक्तिगत उपलब्धियों को हासिल करने की कोशिश में टेस्ट मैच के नतीजे को नजरंदाज नहीं करना है। इस सीरीज के दौरान ही वह ये भी कह चुके हैं कि जो भी खिलाड़ी प्लेइंग 11 से बाहर बैठता है, उसे पता होता है कि उसे बाहर क्यों बिठाया गया है। अब जबकि उन्होंने अपना तिहरा शतक छोड़ा है, तो निश्चित तौर पर उन्होंने टीम के हर खिलाड़ी को संदेश दिया है कि वह जो दूसरों से कहते हैं, वही खुद भी करते हैं। उनकी दूरदर्शिता ही है कि पुणे टेस्ट मैच में चार दिनों में भारतीय टीम ने जीत हासिल की। 

इसी टेस्ट मैच में विराट कोहली ने फॉलोऑन देने का फैसला भी काफी सोच-समझकर किया। अब तक विराट कोहली को बतौर कप्तान 14 टेस्ट मैचों में विरोधी टीम को फॉलोऑन देने का मौका मिला है। इनमें से सात बार यानी आधे मौकों पर उन्होंने फॉलोऑन दिया। इन सात में से पांच मैचों में टीम इंडिया को जीत मिली है। ये आंकड़े बताते हैं कि विराट कोहली की परिपक्वता इस समय किस स्तर पर है। 

कुछ और आंकड़े हैं, जो विराट कोहली के टेस्ट करियर की भव्यता दिखाते हैं। साथ ही साथ इस मिथक को भी तोड़ते हैं कि कप्तानी संभालने के बाद खिलाड़ी की बल्लेबाजी पर असर पड़ता है। विराट कोहली का टेस्ट औसत 41 रनों के करीब था। कप्तानी संभालने के बाद उनका औसत 62 रनों को पार कर चुका है। कप्तानी संभालने के बाद उनके शतकों की संख्या बीस के करीब पहुंच गई है। 

इतना ही नहीं आईसीसी रैंकिंग में भी वह लगातार टॉप दो बल्लेबाजों में बने हुए हैं। उनके शतकों का ‘कन्वर्जन रेट’ 55 के करीब पहुंच गया है और इस मामले में वह सिर्फ सर डॉन ब्रैडमैन से पीछे हैं। पहले 50 टेस्ट मैचों में कप्तानी करते हुए विदेशी पिचों पर सबसे ज्यादा जीत हासिल करने के मामले में विराट कोहली रिकॉर्ड  दर्ज कर चुके हैं। 50 टेस्ट मैचों में कप्तानी के बाद सबसे ज्यादा जीत हासिल करने के मामले में वह स्टीव वॉ और रिकी पॉन्टिंग के बाद तीसरे सबसे सफल कप्तान बन गए हैं। आप ऐसे रिकॉर्ड गिनते-गिनते थक जाएंगे, पर विराट के रिकॉर्ड खत्म नहीं होंगे।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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