खिलाड़ी से नेता बने खिलाड़ियों की कहानी

Asiaville

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Author 2019-09-17 15:50:15

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लोकसभा चुनाव में दिल्ली से दो मशहूर खिलाड़ी अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर रहे हैं.

बॉक्सिंग में ओलंपिक पदक जीतने वाले विजेंदर सिंह को कांग्रेस ने दक्षिण दिल्ली सीट से उम्मीदवार बनाया है. वहीं काफी लंबे समय तक टीम इंडिया का हिस्सा रहे क्रिकेटर गौतम गंभीर को बीजेपी ने पूर्वी दिल्ली से टिकट दिया है.

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इन दोनों के चुनाव मैदान में आने से दिल्ली में मुकाबला का दिलचस्प हो गया है. ऐसा पहली बार नहीं है कि खिलाड़ी खेल का मैदान छोड़कर राजनीति के मैदान में कूदे हों. आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही खिलाड़ियों पर जिन्होंने राजनीति में हाथ आजमाया.

ज्योतिर्मय सिकदर

एथलीट ज्योतिर्मय सिकदर ने 1998 में बैंकाक में हुए एशियन खेलों में आठ सौ मीटर और 15 सौ मीटर स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था. सिकदर ने 2004 के चुनाव से राजनीति में कदम रखा. वो सीपीएम के टिकट पर कृष्णानगर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं. लेकिन वो 2009 का चुनाव हार गई थीं.

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मोहम्मद अजहरूद्दीन

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कलाई के जादूगर के नाम से मशहूर अजहरूद्दीन को कांग्रेस ने 2009 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से टिकट दिया था. वो वहां से चुनाव जीतने में कामयाब भी रहे. लेकिन 2014 के चुनाव में वो अपनी सफलता को दोहरा नहीं सके. उन्हें बीजेपी के कुंवर सर्वेश कुमार सिंह ने हरा दिया था. इसके बाद वो राजनीति से एक तरह से गायब ही हो गए हैं.

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असलम शेर खान

हॉकी के इस अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ने खेल का मैदान छोड़कर 1984 में राजनीति शुरू की. आठवीं लोकसभा के लिए वो 1984 में मध्य प्रदेश के बैतूल से चुने गए. लेकिन 1989 के चुनाव में उन्हें बैतूल से जनता दल की लहर में हार का सामना करना पड़ा.

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साल 1991 के चुनाव में वो एक बार फिर बैतूल से ही चुने गए. वो कुछ समय के लिए बीजेपी में शामिल हुए थे. लेकिन बाद में वो लौटकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे.

राज्यवर्धन सिंह राठौर

साल 2004 के ओलंपिक में भारत के लिए एकमात्र पदक जीतने वाले कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर राजनीति के भी सफल खिलाड़ी हैं. कर्नल राठौर ने अपने करियर में शूटिंग में अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में सात स्वर्ण पदक जीते.

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कर्नल राठौर ने सेना की नौकरी से वीआरएस लेकर बीजेपी की सदस्यता ले ली. बीजेपी ने उन्हें 2014 के चुनाव में जयपुर ग्रामीण सीट से उम्मीदवार बनाया. चुनाव जीतने के बाद उन्हें नरेंद्र मोदी की सरकार में शामिल किया गया. इस बार भी वो जयपुर ग्रामीण सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

मोहम्मद कैफ

आपको ब्रिटेन के लॉर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम की बॉलकनी में सौरव गांगुली का जर्सी निकालकर नेटवेस्ट ट्रॉफी में मिली जीत का जश्न याद होगा. यह मैच भारत ने मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह पारी की बदौलत जीता था. कैफ के खाते में अंडर-19 विश्व कप की जीत के अलावा लॉर्ड्स के मैदान पर मिली शानदार उपलब्धि शामिल है.

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कैफ ने 2014 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर उत्तर प्रदेश के फूलपुर से लड़ा था. लेकिन मोदी लहर में वो उड़ गए थे. उन्हें चौथे स्थान पर रहना पड़ा था. उसके बाद वो एक बार फिर क्रिकेट के मैदान पर नजर आए. लेकिन उन पर किसी का ध्यान नहीं गया.

जयपाल सिंह मुंडा

भारत ने आजादी से पहले 1928 के ओलंपिक में हॉकी का गोल्ड मेडल जीता था. इस टीम के कप्तान थे जयपाल सिंह मुंडा. इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उन्होंने आईसीएस की ट्रेनिंग छोड़ दी थी.

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जयपाल सिंह मुंडा ने 1938 में आदिवासी महासभा का गठन किया था. जिसने अलग झारखंड राज्य की स्थापना की मांग के लिए आंदोलन चलाया था. संविधान सभा में उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों के लिए जोरदार बहस की थी.

दिलीप टिर्की

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान दिलीप टिर्की गोल्डन ब्यॉय के नाम से मशहूर रहे. उन्होंने करीब 250 अंतराष्ट्रीय मैच खेले. टिर्की को ओडीशा के बीजू जनता दल ने 2012 में राज्य सभा भेजा था. वो अप्रैल 2018 तक राज्यसभा में रहे.

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राज्य सभा में रहते हुए दिलीप टिर्की ने 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था. लेकिन बीजेपी के जुएल ओराम के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

नवजोत सिंह सिद्धू

धमाकेदार ओपनर और अपने छक्कों के लिए मशहूर रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने 2004 के लोकसभा चुनाव में पंजाब के अमृतसर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी. वो 2009 के चुनाव में भी इस सीट से जीते.

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साल 2014 के चुनाव में बीजेपी ने नवजोत सिंह सिद्धू की जगह अरुण जेटली को अमृतसर से उम्मीदवार बनाया. लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. किसी भी तरह के बगावत को रोकने के लिए सिद्धू को अप्रैल 2016 में राज्य सभा का सदस्य बनाया गया. लेकिन उन्होंने अगस्त 2016 में राज्य सभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. बाद में वो 2017 में कांग्रेस में शामिल हो गए. इस समय वो पंजाब सरकार में कई विभागों का जिम्मा संभाल रहे हैं.

बाइचुंग भूटिया

पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया ने खेल का मैदान छोड़कर राजनीति के मैदान में आए हैं. उन्होंने हमरो सिक्किम पार्टी के नाम से एक पार्टी बनाई है. उनकी पार्टी इस बार का सिक्किम विधानसभा चुनाव के साथ-साथ राज्य के एकमात्र लोकसभा सीट पर भी लड़ रही है.

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भूटिया 2013 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे. साल 2014 का चुनाव उन्होंने टीएमसी के टिकट पर दार्जिलिंग से लड़ा था. उन्हें बीजेपी के एसएस अहलूवालिया ने हराया था. उन्होंने फरवरी 2018 में टीएमएस से इस्तीफा देकर सिक्किम के लिए अपनी अलग पार्टी बनाने की घोषणा की थी. अब यह 23 मई को ही पता चलेगा कि उनके हिस्से में हार आती है या जीत.

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