खेल मनुष्य जीवन के लिए वरदान है

Vijay News

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Author 2019-10-18 18:00:44

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imgखेल मनुष्य जीवन के लिए वरदान है। आज बाहर खेले जाने वाले खेल लुप्त होते जा रहे है और घर के भीतर खेले जाने वाले खेल बढ़ते जा रहे है। मोबाइल में खेले जाने वाले खेलों का जाल इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि बच्चे बाहर की दुनिया देखना ही भूल गए हैं।
खेल का हमारे जीवन में मानसिक और शारीरिक रूप से काफी महत्व है, जब हम खेल खेलते हैं तो हमारे मस्तिष्क में चल रही परेशानियों को भूलकर एकाग्र करने की क्षमता को बढ़ाता है, खेल से मानसिक तनाव दूर होता है। अगर बात की जाए पेशेवर खिलाड़ियों की तो हमारे देश में पेशेवर खिलाड़ी बहुत अधिक संख्या में है, उनमें काफी जज्बा है जुनून है किंतु वित्तीय सहायता और सही संसाधन ना मिलने के कारण उनकी उम्मीदें धरी रह जाती है।
130 करोड़ की आबादी वाले देश में अभी तक सिर्फ चंद खिलाड़ी ही ओलंपिक में हिस्सा ले पाए और 2016 के रियो ओलंपिक खेल के बाद भारत विश्व में 67 वें स्थान पर रहा। भारत ने ओलंपिक खेल में सन 1900 में पहली बार भाग लिया था और तब से लेकर अब तक सिर्फ 28 ही मेडल जुटा पाए हैं। यह आंकड़ा अपने आप में सोचने पर मजबूर करता है कि क्या भारत के खिलाड़ियों की क्षमता सिर्फ इतनी ही है कि इतने सालों में सिर्फ 28 मेडल ला पाए। आखिर क्या कमियां रह गई हमारे खिलाड़ियों में जो आगे नहीं बढ़ पाए, हालांकि खेलो इंडिया मूवमेंट के बाद से भारत में खेल के प्रति जागरूकता बढ़ी है पर आज भी खिलाड़ियों को पूर्णतरू सरकार का साथ नहीं मिल पाया है। खेल और प्रतिभाशाली युवाओं से भरे देश में, ओलंपिक में असंख्य विजेता होने चाहिए लेकिन फिर भी, भारत इस क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। भारत ने केवल 9 स्वर्ण पदक जीते हैं जिसमें से 8 में भारतीय हॉकी टीम और एक अभिनव बिंद्रा ने निशानेबाजी में जीता था।
हर बार सरकार बजट पेश करती है, और उस बजट का सबसे बड़ा हिस्सा भारत के रक्षा क्षेत्र को दिया जाता है उसके बाद अगर बात की जाए देश में शिक्षा और खेल के बजट की बात की जाती है। एशियाई देशों में चीन, रूस, जापान के खिलाड़ी ही हमेशा अच्छा प्रदर्शन करते है, और विश्व भर में यूरोपीय और अमेरिकी देशों ने काफी अच्छा प्रदर्शन देखने को मिलता है।
अक्सर भारत को यह भी कहा जाता कि माइकल फेल्प्स ने आज तक ओलंपिक में जितने मेडल जीते है उतने ही भारत ने सन् 1900 से आज तक जीते है तो आप सोच सकते है कि हमारे देश में खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना महत्व मिला होगा।
हो सकता है कुछ लोग यह भी मत रखते हो कि भारत एक अविकसित देश होने के कारण खेल कि दुनिया में आगे नहीं बढ़ पाया पर विश्व में कुछ ऐसे भी देश है जैसे , केन्या, जमाईका जो कि भारत के मुकाबले आर्थिक रूप से उतने मजबूत नहीं है फिर भी सालो से काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। भारत में औसतन परिवारों में बचपन से यही पढ़ाया गया है कि पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब और खेलोगे – कूदोगे तो बनोगे खराब और शायद यह बात लोगो को बचपन से ही घर कर गई और बहुत कम लोग ही खेल को प्राथमिकता देकर आगे बढ़ पाते है।
हमारे देश में क्रिकेट को इतना महत्व दिया गया है कि बाकी खेल उसके सामने फिके पड़ गए है, और जब तक हम समान रूप से हर खेल के प्रति आगे बढ़ने की सोच नहीं रखेगे तब तक कुछ उम्मीद लगाना संभव नहीं। भारत में क्षमता या प्रतिभा की कमी नहीं है। यदि कोई खेल किसी देश में लोकप्रिय और अच्छी तरह से प्रस्तुत किया जाता है, तो यह अच्छी तरह से वित्त पोषित होगा और एक लोकप्रिय खेल बन जाएगा। ऐसे कई और प्रतिभाशाली खिलाड़ी होंगे जिन्होंने हमारे देश के लिए अन्य खेलों में पदक जीते हैं जो आज हमारे देश में इतने लोकप्रिय नहीं हैं। एक अधिक विकसित देश में, सभी खेलों को महत्व दिया जाता है और धन दिया जाता है, जो बेहतर प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में मदद करता है।

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