जब सचिन सहित 6 खिलाड़ियों के अपमान पर एक हो गया था, पूरा भारत

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Author 2019-10-25 13:55:54

भारत में क्रिकेट जन-जन की भावनाओं से कितना जुड़ा हुआ खेल है, यह किस्सा इसकी बानगी है। किस्सा नवंबर 2001 का है जब भारतीय टीम टेस्ट सीरीज खेलने दक्षिण अफ्रीका गई थी। एशियाई टीमों के लिए दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड में खेलना हमेशा ही एक अलग तरह की चुनौती रही है. यही कारण है कि इन देशों में मिली हार या जीत को लंबे समय तक याद रखा जाता है.

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लेकिन, भारतीय टीम का एक दक्षिण अफ्रीका दौरा ऐसा भी है जिसे हार और जीत से अलग किसी और वजह से याद किया जाता है. साल 2001 में हुए इस दौरे में टेस्ट सीरीज के दौरान एक ऐसी घटना घटित हुई जो क्रिकेट के इतिहास में अपनी तरह की इकलौती और अनूठी घटना कही जाती है. इसकी शुरुआत सीरीज के दूसरे मैच में मैच रेफरी माइक डेनिस के विवादित फैसलों से हुई थी. इनमें उन्होंने सचिन तेंदुलकर सहित 6 भारतीय खिलाड़ियों पर एक साथ कड़ी कार्रवाई करते हुए इन्हें एक टेस्ट से बाहर बैठने की सजा सुनाई थी.

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वहां एक मैच में सचिन ने गेंदबाजी के लिए बॉल अपने हाथ में ली। उन्होंने देखा कि मैदान में थोड़ी नमी होने से गेंद की सीम में मिट्टी और घास घुस गई है। सचिन ने उसे अंगूठे से साफ किया और गेंद फेंकने लगे।

यह बहुत सामान्य बात थी, लेकिन मैच रेफरी माइक डेनेस ने सचिन पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगा दिया। साथ ही कप्तान सौरव गांगुली पर अपने खिलाड़ियों को नियंत्रित न करने, वीरेंद्र सहवाग पर जरूरत से ज्यादा अपील करने व दीप दासगुप्ता, हरभजन सिंह व बल्लेबाज शिवसुंदर दास पर अन्य कारणों से फीस में कटौती या एक मैच का प्रतिबंध लगा दिया। इससे भारतीय खिलाड़ी हतप्रभ थे क्योंकि सचिन ने गेंद से छेड़छाड़ नहीं की थी और न ही अन्य खिलाड़ियों ने कोई गलती।

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मैच में दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ियों ने भी खूब अपील की और शोर मचाया, लेकिन उन पर किसी भी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगा। सचिन सहित सभी खिलाड़ियों को यह बहुत अपमानजनक लगा कि उन्हें बिना गलती के दंडित किया गया।

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इससे भारत में नाराजगी फैल गई और यह मामला भारत की संसद में भी उठा. डेनेस को नस्लवादी करार दिया गया और आईसीसी पर भारत के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया गया. भारत में इसका जमकर विरोध हुआ, यहां तक कि देश की संसद में भी ये मामला उठाया गया. सांसदों की राय थी कि ब्रिटिश रेफरी माइक डेनिस ने भारतीय खिलाड़ियों के साथ ज्यादती की है और उनके फैसले में रंगभेद का दुराग्रह छिपा है. इनका यह भी कहना था कि अगर भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका में सम्मान के साथ नहीं खेल सकती तो उसे वापस बुला लेना चाहिए.

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मैच रैफरी ने भारतीय खिलाड़ियों पर निम्न लिखित आरोप लगाये:-

सचिन तेंदुलकर - बॉल टेंपरिंग का आरोप, एक मैच का प्रतिबंध

वीरेंद्र सहवाग - मैच में ज्यादा अपील करने का आरोप, एक मैच का प्रतिबंध

सौरव गांगुली - कप्तान होने के नाते अपनी टीम को सही से नहीं संभाल पाने का आरोप, सौरव पर सबसे ज्यादा गाज गिरी. सौरव पर एक टेस्ट व दो एकदिवसीय मैच का प्रतिबंध

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हरभजन सिंह - मैच में ज्यादा अपील करने का आरोप, एक मैच का प्रतिबंध

शिव सुंदर दास - मैच में ज्यादा अपील करने का आरोप, एक मैच का प्रतिबंध

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