जीवन के वो बड़े सबक जो हमे माही ने सिखाए

TYAGI

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Author 2019-10-13 02:34:20

नमस्कार दोस्तो मेरे चैनल पर आपका स्वागत है । भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान ने कई बहुत सी चीज़ों को सही तरीके से किया, जिसकी वजह से हम उस कप को उठा पाए। मनोवैज्ञानिक डॉ हरीश शेट्टी बताते हैं कि आप उनसे क्या सीख सकते हैं।जब आप भारत के विश्व कप विजेता बनने के जश्न में झूम रहे हो, तो उस समय भी आप चाहे तो एम एस धोनी से कुछ तरीके सीख सकते हैं कि कैसे अपने खेल में सर्वोच्च रहा जाए। मनोवैज्ञानिक हरीश शेट्टी उन तरीकों को खोजते हैं जो हमारे कप्तान को सर्वकालिक श्रेष्ठ बनाते हैं।

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आलोचना को अपनी प्रेरणा बनाएं 20-20 विश्व कप के पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान, धोनी ने मुस्कुराहट के साथ रवि शास्त्री की ओर देखा और कहा, “मुझे याद है कि आपने हमें कमज़ोर कहा था और हमने आपके लिए विश्व कप जीत लिया”। यहां वो आदमी है जो महत्वपूर्ण क्रिकेट खिलाड़ी के कटाक्षों के बोझ से दबा नहीं बल्कि जोश, तर्क और नवसृजित इच्छाशक्ति के साथ आगे की ओर बढ़ता रहा। जब कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति आपको कमतर आंके या आपकी क्षमताओं पर भरोसा न करे, आप अपने अंदर के डर, आशंका, क्रोध या उदासी की भावना का अनुभव करें तो इनको एक बड़े संकल्प में बदल डालें। एक बच्चे से पूछें, सचिन तेंदुलकर ने भी आराम नहीं किया जब तक उसने ‘साहित्य साहवास’ के अपने पुराने घर के दोस्तों को हार के बाद टेबिल टेनिस के मैच में हरा नहीं दिया था।

आगे बढ़ें जब भारत हारता है, तो कई बार धोनी सबके सामने टीम की कमियों को स्वीकार करते हैं लेकिन वो ज्यादा समय इसी में फंसे नहीं रहते हैं। एक हार के दौरान, उनका कहना था, “यह मैच खत्म हो गया, चलो अब अगले के लिए प्लान बनाते हैं”। पूर्व के कप्तानों की तरह नहीं, जो बहुत अधिक चिंता, सोचने और आत्मविश्लेषण करने वाले रहे होंगे, हमारे वर्तमान कप्तान चीजों को पीछे छोड़ने की कला में माहिर हो चुके हैं। डर और निराशा का उनके दिमाग में आना मना है। केवल नए मोर्चों पर साफ़ आंखों और तरोताज़ा फितरत के साथ ध्यान केंद्रित करना है। खुद को स्वंय की या दूसरे की अति आलोचना का शिकार बनने से बचें। यह आपको अपंग बना सकता है।

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मैं नहीं हम विज़य के दिन, विश्व कप हर खिलाड़ी के हाथ में था, सिवाए धोनी के। कुछ साल पहले, धोनी ने एक टेस्ट सीरीज़ में मिली जीत के बाद अनिल कुंबले को कप उठाने के लिए कहा था। अपनी टीम के प्रति उनका लगाव दिखाई देता है और यह बंधन मजबूत है। उनके पास सभी के लिए तारीफ है लेकिन उन्होंने कुछ भी नहीं कहा जब गंभीर केवल खराब शॉट के कारण शतक बनाने में असफ़ल रहे थे। वह खरे हैं, स्पष्टवादी भी। वो इस प्रकार के सार्वजनिक बयान दे चुके हैं जैसे, “हमारे मध्यक्रम को काम करना चाहिए” या “सुशांत को सभ्य व्यवहार करना चाहिए”।

शांत रहिए धोनी तनाव के पलों में भी शांत रहते हैं। कोई भद्दी बात या खराब शब्दों का इस्तेमाल नहीं। उनकी खुद से बात करने की आदत के बारे में जानना काफी मजेदार रहेगा। यह शायद ऐसे विचारों को शामिल करता है जैसे ‘शांत रहो’, ‘ध्यान लगाओ’ या ‘मुझे कुछ दूसरा तरीका अपनाना है’। डर और आशंका की भावना से बाहर जाना है। संभवतः इन भावनाओं को अपने मानस पटल पर आने और बाहर निकालने को ध्यान देते हैं। यह विचार प्रक्रिया उनके चेहरे पर दिखाई देती है जो कि कई बार परेशानी के दौर में यह बचपना सा लगता है। इसलिए, जब स्थिति विपरीत हो, तो केवल अपनी भावनाओं का आंकलन करें कि कैसे वो बाहर आ रही हैं। अगर आप खुद को खीझते हुए और चिल्लाते हुए पाते हैं, तो आप भावनात्मक रुप से बेकाबू हो चुके हैं और आप दोस्तों व लड़ाई दोनों को हार जाएंगे।

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अगर ऐसा नहीं है, रचनात्मक प्रतिक्रिया जाग्रत होगी।उत्साह बनाए रखिएएमएस धोनी ने यह कहकर रवि शास्त्री को चिढ़ाया, अगर हमको हार मिलती थी, तो कई सवाल उठते —श्रीसंथ क्यों, मैंने युवराज से पहले बल्लेबाज़ी क्यों की। उनका मैदान के बीच में रहना यह बताता है कि वो चुनौतियां पसंद करते हैं और पूर्व महान खिलाड़ियों से लगातार मिल रही सलाह से परेशान नहीं होते हैं। अनिल कुंबले की तरह, जिन्होंने अपने रिटायरमेंट पर बताया कि उन्होंने अपने कमज़ोर समय में सारी सलाहों को दरकिनार किया और दृढ़ बने रहे, हमारे कप्तान भी ‘खतरों का सामना करके पुराने अनुभवों को बदलने’ का अभ्यास करते हैं। धोनी का मंत्र स्पष्ट है— मुश्किल में डटे रहो, चुनौती का सामना करो और अपने विचारों का पालन करो।

कृतज्ञता अंतिम लेकिन महत्वपूर्ण बात, धोनी अपनी कृतज्ञता को महसूस और सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करते हैं। जीत के बाद, उन्होंने कहा, “मैं पहले आना चाहता था और गैरी ने इस पर मेरा साथ दिया”। बड़े ही सामान्य ढ़ंग से उनके मुंह से निकला “‘गैरी और पैडी’ का धन्यवाद और बाकी टीम के खिलाड़ियों का भी जिन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई”। कृतज्ञता उनके व्यक्तित्व का एक गुण हैं। .

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