टेस्ट क्रिकेट में रोहित शर्मा का नया अवतार

LiveHindustan

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Author 2019-10-23 03:30:39

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टेस्ट क्रिकेट में रोहित शर्मा ने करीब छह साल पूरे कर लिए हैं। टेस्ट करियर में रोहित के खाते में 30 टेस्ट मैच और छह शतक हैं। दिलचस्प बात यह है कि पिछले छह साल में पांच साल, 11 महीने ने और 27 टेस्ट मैचों में उन्होंने तीन शतक बनाए थे और पिछले एक महीने से भी कम समय में वह तीन टेस्ट मैचों में तीन शतक लगा चुके हैं। इनमें एक दोहरा शतक भी शामिल है। साथ ही इनमें विशाखापट्टनम टेस्ट मैच की दोनों पारियों के शतक शामिल हैं। यही वजह है कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मौजूदा शृंखला में उनके प्रदर्शन को उनके नए अवतार की तरह देखा जा रहा है। 

यह नया अवतार इसलिए भी है, क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में इसी सीरीज में उन्हें सलामी बल्लेबाज की भूमिका दी गई। इस भूमिका को निभाते हुए उन्होंने तीन में से दो मैचों में ‘मैन ऑफ द मैच’ का खिताब हासिल किया, बल्कि उन्हें ही ‘मैन ऑफ द सीरीज’ भी चुना गया। इस शृंखला में उन्होंने कुल 529 रन बनाए। साल 2005 के बाद यह पहला मौका है, जब किसी भारतीय बल्लेबाज ने एक ही सीरीज में 500 से ज्यादा रन बनाए हों। 2005 में वीरेंदर सहवाग ने यह कारनामा पाकिस्तान के खिलाफ किया था। एक सीरीज में 500 से ज्यादा रन बनाने वाले रोहित पांचवें भारतीय बल्लेबाज भी बन गए। वीरेंदर सहवाग के अलावा यह कारनामा सुनील गावस्कर, विराट कोहली और सौरव गांगुली कर चुके हैं। रोहित ने एक सीरीज में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का वेस्ट इंडीज के शिमरन हेटमेयर का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। उन्होंने इस सीरीज में 19 छक्के लगाए। हरभजन के नाम 14 छक्कों का रिकॉर्ड है। यानी विराट कोहली की तर्ज पर ही रोहित शर्मा ने इस टेस्ट सीरीज में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड कायम किए हैं। 
जाहिर है, इन टेस्ट पारियों का रोहित शर्मा के करियर में बड़ा महत्व है। उन्होंने  तीन शतक ऐसे वक्त में लगाए, जब यह आशंका गहराती जा रही थी कि रोहित भी टेस्ट क्रिकेट के मामले में युवराज सिंह के रास्ते पर बढ़ रहे हैं। दरअसल, युवराज सिंह सीमित ओवरों में भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कामयाब खिलाड़ियों में से एक हैं, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी वह खुद को टेस्ट क्रिकेट में साबित नहीं कर पाए। रोहित शर्मा के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था। जिन आंकड़ों का जिक्र हमने पहले ही किया कि 27 टेस्ट मैच खेलने के बाद उनके खाते में सिर्फ तीन शतक थे। इस बात का डर तब और बढ़ गया, जब वेस्ट इंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए उन्हें टीम में तो रखा गया, लेकिन प्लेइंग-11 में जगह नहीं मिली। असल में, केएल राहुल पर कप्तान विराट कोहली का भरोसा कम ही नहीं हो रहा था। लेकिन जब कोहली का यह भरोसा डगमगाया, तो फिर रोहित शर्मा की कामयाबी का रास्ता निकला। हांलाकि उनके लिए यह चुनौती आसान नहीं थी। खुद रोहित ने तीसरे टेस्ट मैच के बाद यह बात कही भी, लेकिन जिस शानदार अंदाज में उन्होंने इस चुनौती का सामना किया है, वह यकीनन उनके करियर के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। खास तौर पर तीसरे टेस्ट मैच में रोहित ने मुश्किल परिस्थितियों में शतक लगाया। उन्होंने भारत की पारी को उस वक्त संभाला, जब महज 39 रनों पर तीन विकेट गिर चुके थे। 

इन शतकों की नींव को भी पहचानना होगा। जो रोहित शर्मा ने 2019 विश्व कप के दौरान ही डाली थी। इंग्लैंड में जिस तरह से उन्होंने तेज गेंदबाजों की गेंदों को ऑफ स्टंप के बाहर छोड़ना शुरू कर दिया था, उसे देखकर ही लगा था कि अब वह टेस्ट क्रिकेट के लिए नई तैयारी के साथ उतरेंगे। विश्व कप में उन्होंने पांच शतक लगाए थे दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, इंग्लैंड, श्रीलंका और बांग्लादेश के खिलाफ। और इन सारे शतकों में उनकी पारी का ‘पैटर्न’ लगभग एक सा था। रोहित ने पहले गेंदबाजों को इज्जत दी और फिर प्रशंसकों से इज्जत कमाई। ठीक उसी संयम के साथ, जब टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने बल्लेबाजी की शुरुआत की, तो उन्हें कामयाबी मिली। मुंबई के ही एक और दिग्गज सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर हमेशा कहा करते हैं कि टेस्ट क्रिकेट में कामयाबी का एक तय फॉर्मूला है, शुरुआती 30-40 मिनट विरोधी टीम के गेंदबाजों को सम्मान दिया जाए। रोहित शर्मा ने इस सबक को साध लिया है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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