ताहिरा की शौर्य-कथा, अध्याय 4 (भाग-3), 'प्रार्थना का चमत्कार'

Sanjeevni Today

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Author 2019-10-11 09:56:16

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ताहिरा ने अपने चेहरे से पर्दा हटाया और माहकू में बाब के कारावास की ओर मुड़ गईं और प्रार्थना करना प्रारंभ कर दिया।

डेस्क। घंटे- दर घंटे वे सवाल कर-कर के इसी कोशिश में लगे रहे कि किसी तरह उन लोगों पर जोर देकर उन्हें यह मनवा लें कि ताहिरा के चाचा की हत्या में उन लोगों का हाथ था। ताहिरा ने शांति से उत्तर दिया “हम इसके विषय में कुछ नहीं जानते हैं। इसके विषय में हमको कुछ पता नहीं है। घृणा से उबलते हुए पति को भय हो गया कि कहीं उन्हें छोड़ नहीं दिया जाए, इसलिए वह लगातार राज्यपाल से अनुरोध करता रहा था कि ताहिरा को कठोर दंड दिया जाए "कुछ कठोर, बहुत ही कठोर।

इस संकेत को ध्यान में रखते हुये ताहिरा को दागने के लिये उसने जल्लाद को लोहे की दहकती छड़ें लाने के लिये कहा । ताहिरा को आतंकित करने के लिये और शायद , यंत्रणा देकर झूठी स्वीकृति प्राप्त करने के लिये कुफियेह के हाथ को आधा-आधा दरवाजे के इस ओर से दबाकर दूसरी ओर से आधे को गरम लोहे से दागने की तैयारी की।

ताहिरा को पता था कि वह असहाय थीं और उनकी एक ही शरण थी, सर्वसामर्थ्यशाली परमेश्वर की। उन्होंने अपने चेहरे से पर्दा हटाया और माहकू में बाब के कारावास की ओर मुड़ गईं और प्रार्थना करना प्रारंभ कर दिया। गर्म छड़ो को लाया गया और कुफियेह के हाथों को दागने के लिये तैयार कर दिया गया।

इसी समय एक मुनादी को बाहर गली में यह कहते हुये सुना गया, ' हत्यारा मिल गया है। उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। वह स्वयं ही सरकारी कार्यालय में आया ताकि निर्दोष लोगों को सजा नहीं हो पाये।

ताहिरा और कूफियेह को छोड़ दिया गया। ताहिरा को एक कैदी के रूप में अपने पिता के पास वापस भेज दिया गया। उनके पिता ने एक बार और जहर देकर उनकी जान लेने की असफल कोशिश की लेकिन इन सभी विरोधों के बावजूद ताहिरा ने अनेक लोगों को प्रभुधर्म का शिक्षण दिया। उसने गंभीर रूप से काजवीन के लोगों पर प्रभाव डाला ।

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हालाँकि सौ से अधिक धार्मिक नेताओं को इसके अंदर ले जाने का गौरव प्राप्त हुआ लेकिन काजवीन में ताहिरा द्वारा प्राप्त विजय अभी तक प्राप्त विजयों से महान थीं l

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