पीसीए का किंग कौन , 4 अक्तूबर को होगा फैसला

Amar Ujala

Amar Ujala

Author 2019-10-03 04:57:44

पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) के चुनाव चार अक्तूबर को होंगे। इसके लिए नामांकन की प्रक्रिया एक अक्तूबर से शुरू हो चुकी है। तीन अक्तूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। चुनाव लोढ़ा कमेटी के मुताबिक कराए जा रहे हैं। पीसीए में यह चुनाव प्रधान पद, उप प्रधान पद, सेक्रेटरी, खजांची, ज्वाइंट सेक्रेटरी, मेंबर्स एपेक्स कमेटी के लिए होंगे।
बता दें कि पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) में 200 के करीब सदस्य हैं। चार अक्तूबर को होने वाले चुनाव में पीसीए के लाइफ टाइम मेंबर्स, एग्जीक्यूटिव मेंबर, स्टेट से इंटरनेशनल लेवल तक क्रिकेट खेल चुके खिलाड़ी अपने मत का प्रयोग कर सकते हैं। इस चुनाव केलिए राजीव शर्मा को इलेक्शन कमिश्नर बनाया गया है। आईएएस राजीव शर्मा हरियाणा के चुनाव आयुक्त रह चुके हैं। बता दें कि इंद्रजीत सिंह बिंद्रा सबसे लंबे समय तक पीसीए के प्रधान रहे हैं। वह लगातार 36 साल (वर्ष 1978 से 2014 तक) तक लगातार प्रधान पद पर काबिज रहे। वह पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (पीसीए) के प्रधान रहे। उनके बाद डीपी रेड्डी और फिर राजिंद्र गुप्ता प्रधान चुने गए। इंद्रजीत सिंह बिंद्रा बीसीसीआई के प्रधान पर भी रह चुके हैं।
राजिंद्र गुप्ता ने सितंबर में प्रधान पद से दिया था इस्तीफ ा : पीसीए के प्रधान पद की कुर्सी सितंबर माह से ही खाली पड़ी है। सितंबर शुरू में ही प्रधान पद से राजिंद्र गुप्ता ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि वह अपने पद पर रहते हुए क्रिकेट के लिए कुछ काम नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही मीडिया के सामने यह भी कहा कि पीसीए के अंदरूनी माहौल से वह काफी तंग आ गए थे। प्रधान बनने के बाद उन्हें पीसीए में अलग कमरा तक नहीं दिया गया। उन्हें मीटिंग में भी नहीं बुलाया जाता था, इस वजह से उन्हें घुुटन महसूस हो रही थी। हालांकि पीसीए उसके बाद से कहता रहा है कि उन्हें अभी तक लिखित या फिर मेल के जरिए राजिंद्र गुप्ता का इस्तीफा नहीं मिला हैै। राजिंद्र गुप्ता ने वर्ष 2017 में सर्वसम्मति से पीसीए के प्रधान बने थे। राजिंद्र गुप्ता ने फिर प्रधान पद के लिए नामांकन पत्र भरा है।
इंटरनेशनल क्रिकेटर भी डालेेंगे वोट : पीसीए ने इंटरनेशनल क्रिकेट खेल चुके पूर्व क्रिकेटर दिनेश मोंगिया को वोट डालने का अधिकार दे दिया है। इससे पहले चार अन्य इंटरनेशनल खिलाड़ी भूपिंदर सिंह सीनियर, विक्रम राठौर, रतिंदर सिंह सोढी, हरविंदर सिंह को अपने मत डालने का अधिकार पिछले महीने ही मिल चुका है।

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