पेंट हाउस के मालिकान हक के लिए सुप्रीम कोर्ट गए धोनी

Asiaville

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Author 2019-09-17 15:37:23

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आम्रपाली ग्रुप के 55 सौ वर्ग फुट के एक पेंट हाउस के मालिकाना हक को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इस पेंट हाउस को धोनी ने आम्रपाली ग्रुप के एक प्रोजेक्ट में करीब 10 साल पहले बुक कराया था. आम्रपाली ग्रुप इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त फॉरेंसिक ऑडिटरों की ओर से नोटिस मिलने के बाद धोनी ने अदालत का रुख किया. नोटिस में इस घर की खरीद को लेकर उनसे सफाई मांगी गई है.

याचिका धोनी के वकील शेखर कुमार ने दाखिल की है. इसमें धोनी ने आम्रपाली स्फीयर फेज-1 के एक पेंट हाउस पर अपने मालिकाना हक की रक्षा करने की अपील की गई है. धोनी के मुताबिक इस पेंट हाउस को बिल्डर 31 अगस्त 2009 में हुए एक वैध समझौते के बाद उन्हें बेचने को राजी हुए थे. यह 4 बीएचके का यह पेंट हाउस नोएडा के सेक्टर 45 में है.

क्रिकेटर को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट आम्रपाली मामले की सुनवाई 30 अप्रैल को करेगा. धोनी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अदालत ने पिछले साल 5 दिसंबर को फॉरेंसिक ऑडिटर्स को उन खरीदारों को नोटिस जारी करने को कहा था जिन्होंने थोड़ा भुगतान कर फ्लैट बुक कराया था.

धोनी का कहना है कि उनके अधिकृत प्रतिनिधि ने फॉरेंसिक ऑडिटर्स के नोटिस का विस्तृत जवाब दे दिया है. उन्होंने बताया कि पेंट हाउस के लिए 20 लाख रुपए का भुगतान किया गया. लेकिन घर का केवल थोड़ा सा ही काम हुआ है और उन्हें अभी तक उस पर कब्जा भी नहीं मिला है.

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उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने घर के लिए जो रकम जमा कराई है, वह कम नहीं है. उनका कहना है कि वो आम्रपाली समूह के ब्रांड अंबेसडर रहे हैं, इस वजह से उन्हें वह घर कम कीमत पर मिला. उन्होंने कहा कि वैध समझौता होने के बाद भी यह पूछताछ का आधार नहीं हो सकता है.

धोनी की ओर से दायर हलफनामे में पेंट हाउस की कीमत तो नहीं बताई गई है. लेकिन अनुमान है कि उसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये है.

उनका कहना है अन्य खरीदारों और कर्ज देने वालों की ही तरह आम्रपाली ने उनके साथ भी धोखा किया है. धोनी ने अपनी याचिका में अदालत से पेंट हाउस के अलॉटमेंट को लेकर पूछताछ न करने और उन्हें उस पर कब्जा लेने की इजाजत देने की अपील की है.

आम्रपाली के खास

सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त फॉरेंसिक ऑडिटर रवि भाटिया और पवन अग्रवाल की रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने से पहले आम्रपाली ग्रुप के वकील के पास पहुंच जाने पर आपत्ति जताई थी. अदालत ने कहा था कि वह 30 अप्रैल से घर के खरीदारों की याचिका पर सुनवाई करेगा कि मालिकाना उन्हें दिया जाना चाहिए या नहीं.

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अदालत ने दोनों फॉरेंसिक ऑडिटर्स को 28 अप्रैल तक अपना काम पूरा कर लेने को कहा है. इन दोनों ऑडिटरों ने अदालत को बताया है कि घर खरीदने वालों का करीब तीन हजार करोड़ रुपया आम्रपाली के प्रमोटरों ने कहीं और लगा दिया. उनका कहना है कि रकम को डाइवर्ट करने के लिए इस ग्रुप ने सौ से अधिक शेल कंपनियां बनाईं.

आम्रपाली ग्रुप में घर खरीदने वालों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कहा कि वह आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा और दो अन्य निदेशकों को गिरफ्तार कर पूछताछ करे. इसके अलावा अदालत ने ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा और निदेशक शिवप्रिया और अजय कुमार की निजी संपत्ति को अटैच करने का भी आदेश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने एक कीमत लगाने वाला भी नियुक्त किया है, जो आम्रपाली ग्रुप के अब तक नहीं बिके 5229 फ्लैटों की कीमत का आकलन करेगा. इनमें वो फ्लैट भी शामिल हैं, जिन्हें इस समूह ने केलव एक, 11 और 12 रुपये में ही बुक किया था. अदालत ने इसकी रिपोर्ट मांगी है.

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