मैनेजमेंट का साथ होता तो खेल सकता था एक और वर्ल्डकप

Dainik Tribune Online

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Author 2019-09-28 12:11:32

imgनयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा)
पूर्व भारतीय बल्लेबाज युवराज सिंह ने दावा किया कि अंतर्राष्ट्रीय कैरियर के अंतिम पड़ाव में टीम प्रबंधन ने उन्हें निराश किया और अगर उन्हें पूरा समर्थन मिला होता तो वह 2011 में शानदार प्रदर्शन के बाद एक और विश्व कप खेल सकते थे। युवराज ने एक चैनल से कहा, ‘मुझे दुख होता है कि 2011 के बाद मैं एक और विश्व कप नहीं खेल सका। टीम प्रबंधन और इससे जुड़े लोगों से मुझे मुश्किल से ही कोई सहयोग मिला। अगर उस तरह का समर्थन मुझे मिलता तो शायद मैं एक और विश्व कप खेल लिया होता।’ उन्होंने कहा,‘लेकिन जो भी क्रिकेट मैंने खेला, वो अपने दम पर खेला। मेरा कोई ‘गॉडफादर’ नहीं था। ‘’ युवराज ने कहा कि फिटनेस के लिये अनिवार्य ‘यो-यो टेस्ट’ पास करने के बावजूद उनकी अनदेखी की गयी। उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन को उनसे पीछा छुड़ाने के तरीके ढूंढने के बजाय उनके कैरियर के संबंध में स्पष्ट बात करनी चाहिए था।
संन्यास को लेकर कोई पछतावा नहीं
इसके बावजूद युवराज ने कहा कि उन्हें खेल से संन्यास लेने के समय को लेकर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे दिमाग में कई चीजें चल रही थी। विश्व कप शुरू हो गया था और टीम आगे बढ़ रही थी। मैं भारत से बाहर कुछ क्रिकेट खेलना चाहता था। जिदंगी आगे नहीं बढ़ रही थी, यह तनावपूर्ण था।’ युवराज ने कहा, ‘मैं संन्यास को लेकर पसोपेश में था। मेरी कुछ साल पहले शादी हुई थी, इसलिये मैं घर पर भी ध्यान देना चाहता था। मेरे लिये कैरियर का समापन थोड़ा बोझ बनता जा रहा था।’ उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे भारत से बाहर लीग में खेलना था तो मुझे संन्यास लेना पड़ता तो मैंने सोचा कि यह सही समय होगा। चीजें सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही थीं इसलिये मैंने सोचा कि युवाओं के लिये टीम को आगे बढ़ाने का यह सही समय है और मेरे लिये संन्यास लेना सही होगा।’
कभी नहीं सोचा था कि ‘मैन आफ द मैच’ बनने के बाद टीम से बाहर कर देंगे
युवराज ने कहा, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे 2017 चैम्पियंस ट्राफी के बाद 8 से 9 मैच में से 2 में मैन आफ द मैच पुरस्कार जीतने के बाद मुझे टीम से बाहर कर दिया जायेगा। मैं चोटिल हो गया और मुझे श्रीलंका श्रृंखला की तैयारी के लिये कहा गया।’ उन्होंने कहा, ‘अचानक ही मुझे वापस आना पड़ा और 36 साल की उम्र में ‘यो-यो टेस्ट’ की तैयारी करनी पड़ी। यहां तक कि ‘यो-यो टेस्ट’ पास करने के बाद मुझे घरेलू क्रिकेट में खेलने को कहा गया। उन्हें ऐसा लगा था कि मैं इस उम्र में इस टेस्ट को पास नहीं कर पाऊंगा। इससे उनके लिये मुझे बाहर करने में आसानी हो जाती।’ युवराज ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण था क्योंकि जिस खिलाड़ी ने 15-16 साल तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेला हो, उससे आपको सीधे बैठकर बात करनी चाहिए। किसी ने भी मुझे कुछ नहीं कहा, न ही किसी ने वीरेंद्र सहवाग या जहीर खान से ऐसा कहा।’

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