वाह भाई! आपके निर्णय पर तो कोई अंगुली भी नहीं उठा सकता

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Author 2019-10-06 09:32:42

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क्रिकेट जगत में क्रिकेटर भाईयों के धमाल की चर्चाएं आम बात है। ऐसे कई क्रिकेट बंधु (भाईयों की जोड़ी) हुए हैं जो क्रिकेट के मैदान में अपना जलवा दिखाया है। ऐसे क्रिकेटर बंधु बिहार में भी हैं जिनके बारे में लोग जानते हैं पर इन क्रिकेटरों के चौके-छक्के की मान्यता प्रदान करने वाले बिहार के अंपायर बंधुओं के बारे में कम ही लोग जानते हैं। कुछ लोग इन अंपायर बंधुओं के बारे में जानते हैं पर ज्यादा लोग अनभिज्ञ हैं। आज बिहार के क्रिकेट अंपायर बंधुओं के बारे में जानते है।

श्रीपत राव और विनायक राव 
श्रीपत राव व विनायक राव दो ऐसे भाई हैं जिनमें क्रिकेट के प्रति समर्पण शिखर को स्पर्श करती है। दोनों ही अच्छे खिलाड़ी रहे हैं और विभागीय मैचों में भी इनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। 80 के दशक के बीच वर्ष 1984-85 में दोनों भाई अविभाजित बिहार के स्टेट पैनर अंपायर हुए। इन्होंने बिहार में अंपायरिंग में व्यापक प्रतिष्ठा पाई और हेमन ट्रॉफी सहित बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के कई मैचों अपनी प्रतिष्ठापूर्ण उपस्थिति अंपायर के रूप दर्ज की। विनायक वर्तमान समय में अंपायरिंग कर रहे हैं।

जसीम-अनीस और वसीम
अपने पारिवारिक पृष्ठभूमि के विपरीत जाकर इन भाईयों ने क्रिकेट अंपायरिंग में अपना कैरियर बनाया। इन तीनों में से दो जसीम-अनीस मैदान पर हमेशा अंपायरिंग करते दिखते हैं। बड़े भाई वसीम अहमद कम अंपायरिंग कराते हैं। एक और भाई तौसिफ अहमद भी क्रिकेट से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया है। कुछ मैचों में अंपायरिंग भी की है। जसीम-अनीस स्टेट पैनल अंपायर बनने के बाद राज्य के कई बड़े मैचों में अंपायरिंग करते नजर आते हैं। 

आशीष सिन्हा-आशुतोष कुमार
इन दोनों अंपायर बंधुओं की जोड़ी बिहार की नामी जोड़ी हैं। दोनों भाई क्लब स्तर के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। आशीष सिन्हा ने 15 साल की उम्र में वर्ष 1990-91 से अंपायरिंग की शुरुआत की, जिसका श्रेय एनआईएस कोच सुशील मिश्रा और प्रेम वल्लभ सहाय को वो देते हैं। इसके बाद इन्हें राजधानी में आयोजित होने वाले राजेश मेमोरियल व सुखदेव नारायण क्रिकेट प्रतियोगिता में अंपायरिंग का मौका मिला। यहां उन्हें बहुत कुछ सीखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। विजय कुमार नारायण चुन्नू, रविशंकर प्रसाद सिंह, डॉ संजय कुमार, डॉ विनय सिन्हा ने अपने नेतृत्व में होने वाली प्रतियोगिताओं में इन्हें मौका दिया। पटना क्रिकेट लीग में मौका और एक स्थापित अंपायर की मुहर लगी। पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर एलपी वर्मा को अपना गुरू मानने वाले आशीष सिन्हा कहते हैं कि मैंने अंपायरिंग के गुर उन्हीं से सीखे और अपने आपको निखारने का प्रयत्न किया। मैचों की गणना करना तो मुश्किल है पर उन्होंने अबतक लगभग पांच हजार मैच कराये होंगे। आशीष सिन्हा ने वर्ष 2004 में स्टेट पैनल अंपायर की परीक्षा पास की। वर्ष 2010 में पांचवें स्थान पर रहे। आशुतोष कुमार वर्ष 2007 से अंपायरिंग की शुरुआत की और वर्ष 2011 में स्टेट पैनल अंपायर बने। वर्ष 2019 में इन्होंने परीक्षा को पास किया और ग्रेड ए अंपायर बने। आशुतेष भी अंपायरिंग में पूरी तरह सक्रिय हैं। 

राजेश रंजन और प्रभात रंजन
राजेश रंजन उर्फ राजू। राजेश रंजन तो राजधानी के क्रिकेट अंपायरिंग की एक रीढ़ हैं। उन्होंने कई क्रिकेट प्रतियोगिताओं, पटना जिला क्रिकेट लीग और बीसीए के कई मैचों में अंपायरिंग की है। इन दोनों भाईयों ने 29 वर्ष पहले क्रिकेट की अंपायरिंग शुरू की थी। आज भी ये लगातार मैच कराते नजर आते हैं। राजेश रंजन की बड़ी पुत्री कृतिका रंजन बास्केटबॉल प्लेयर है और वह बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। वे कहते हैं कि जब हमने अंपायरिंग शुरू की थी 50 रुपए एक मैच के मिलते थे।

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