विराट की कप्तानी में यूं बढ़ी पेस अटैक की धाक

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Author 2019-10-24 15:52:23

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नितिन नाइक, मुंबई
1970 के दशक के मध्य में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में एक ऐसा भी दौर था, जब क्रिकेट फैन्स यह नारा खूब लगाते थे- ‘एशेज टू एशेज, डस्ट टू डस्ट, इफ थॉमसन डज नॉट गेट या, लिली मस्ट यानी राख को राख, धूल को धूल, अगर थॉमसन नहीं तो लिली जरूर। (यह नारा खासतौर से एशेज सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर आई इंग्लैडं टीम के लिए इस्तेमाल होता था।)’ जब तक जेफ थॉमसन और डेनिस लिली की जोड़ी एक साथ खेली, तब तक ऑस्ट्रेलिया के हर मैदान पर इस नारे की गूंज खूब सुनाई पड़ती थी।

ऑस्ट्रेलिया का यह मशहूर नारा इस बात का प्रतीक था कि ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों थॉमसन और लिली की इस जोड़ी का खौफ किस कदर था। अब अगर भारतीय क्रिकेट फैन्स भारतीय पेस बैटरी के लिए इस मुहावरे को अपना लें, तो अपने बोलरों की प्रशंसा के लिए उनके पास जी भर कर यह नारा गाने का मौका होगा। पिछले कुछ समय से भारतीय पिचों पर भारतीय तेज गेंदबाजों ने जो उम्दा प्रदर्शन किया है उसकी प्रशंसा दुनिया भर में हो रही है।

ऐसे में भारतीय फैन्स भी अब यह नारा गुनगुना सकते हैं- ‘राख को राख, धूल को धूल अगर शमी नहीं तो उमेश जरूर’ इतना ही नहीं इस फेहरिस्त में वे इसमें इशांत शर्मा, जसप्रीत बुमराह और भुवनेश्वर कुमार का भी नाम जोड़ सकते हैं।

विराट की कप्तानी में फास्ट बोलरों ने लगाई विकेटों की झड़ी
2015 से ही देखें, जब से ने टीम इंडिया की टेस्ट क्रिकेट में कमान संभाली है, तब से ही भारतीय पेस बैटरी के रूप में शमी, इशांत, उमेश और भुवी ने मिलकर 52 टेस्ट में 51.51 के स्ट्राइक रेट से 428 विकेट अपने नाम किए हैं। इस दौरान इन बोलरों ने 16 बार 5 विकेट भी अपने नाम किए। भारतीय तेज गेंदबाजों का घरेलू औसत भी 25.54 रहा।

भारतीय पिचों पर फास्ट बोलिंग का दबदबा
इन तेजगेंदबाजों ने इस दौरान विदेशों में 26 टेस्ट खेले हैं, जिनमें उन्होंने 152 विकेट अपने नाम किए। बाकी के बचे आधे (26 टेस्ट) मैच इन गेंदबाजों ने अपने घर पर खेले, जहां उन्होंने आश्चर्यजनक रूप से 276 विकेट अपने नाम किए, जिनमें 13 बार एक मैच में 5 विकेट लेने का कारनामा भी किया।

भारतीय पिचें फास्ट बोलरों के लिए सपॉर्टिव नहीं मानी जाती हैं लेकिन इन पिचों पर पिछले कुछ समय भारतीय फास्ट बोलरों ने जो प्रदर्शन किया है वह काबिलेतारीफ है। हाल ही में भारत ने साउथ अफ्रीका को 3-0 से टेस्ट सीरीज में पटकनी दी। शमी और उमेश की जोड़ी ने फास्ट बोलिंग के लिए सपॉर्टिव पिचें न होने के बावजूद अपनी क्षमता और पेस का इस्तेमाल करते हुए लाजवाव प्रदर्शन किया। इस दौरान भारतीय टीम में जसप्रीत बुमराह (चोटिल) भी उपलब्ध नहीं थे, जो कि इस समय भारतीय टीम की पेस बोलिंग अटैक की धुरी हैं।

अपने लक्ष्य बखूबी जानती है टीम इंडिया के पेस बैटरी: पोलक
साउथ अफ्रीका पूर्व कप्तान और फास्ट बोलर शॉन पोलक ने भारतीय गेंदबाजों पर किए अपने विश्लेषण में बताया, ‘वे (भारतीय तेज गेंदबाज) अपनी योजना बखूबी समझते हैं। उनमें ऊर्जा का प्रवाह भी शानदार है। उनके इरादे भी साफ हैं और उनमें वह आत्मविश्वास भी झलक रहा है कि वह किसी भी ट्रैक पर विकेट हासिल कर लेंगे।’ पोलक ने यह बात क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज के एक कार्यक्रम में कहीं।

शानदार था भारतीय पेसरों का प्लान: ग्रीम स्मिथ
इतना ही नहीं इस मैच के प्रसारणकर्ता स्टार स्पोर्ट्स के एक कार्यक्रम में साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ ने भी माना कि साउथ अफ्रीकी टीम यहां बहुत ज्यादा स्पिन बोलिंग की अपेक्षा कर रही थी लेकिन उन्हें पेस बोलिंग अटैक ने सीरीज से बाहर कर दिया। शमी और उमेश ने जिन एरिया में बोलिंग की वह लाजवाब है। वे पूरी सीरीज में स्टंप पर गेंद मारते रहने का प्रयास करते नजर आए और उन्होंने बल्लेबाज को खेलने पर मजबूर किया।

विराट की कप्तानी भी शानदार
इस दौरान स्मिथ ने विराट कोहली की कप्तानी की भी तारीफ की, जिन्होंने अपनी बोलरों को बिल्कुल सही अदाज में सही समय पर रोटेट किया। बीते दो सालों में भारतीय तेज गेंदबाजों द्वारा किए गए शानदार प्रदर्शन के बाद अगर ऐसा कहा जाए कि यह भारत का अब तक का सबसे शानदार पेस अटैक है, तो क्या यह कहना सही होगा?

क्या यह है भारत का सर्वश्रेष्ठ पेस अटैक?
भारतीय टीम के पूर्व लेफ्ट आर्म सीमर (फास्ट बोलिंग) को इसमें अभी भी एक समस्या नजर आती है। नेहरा कहते हैं, ‘हां, यह बेहद प्रतिभाशाली पेस अटैक है। लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि इनसे पहले जो फास्ट बोलर खेले वे शानदार नहीं थे। अब खिलाड़ियों की फिटनेस पहले से शानदार हुई है, भारत A और आईपीएल से उन्हें खुद को व्यक्त करने का मौका मिल रहा है, जिससे खिलाड़ियों के खेल में सुधार हो रहा है। अब खिलाड़ियों में आपसी प्रतिस्पर्धा है और वह हर बार मानदंडों को पहले से ऊंचा करना चाहते हैं।’

पहले भी भारत को मिले हैं शानदार फास्ट बोलर:
नेहरा
नेहरा ने आगे कहा, ‘हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय टीम में कपिल देव, जहीर खान और जवागल श्रीनाथ सरीखे गेंदबाज भी रहे हैं, जिन्होंने भारतीय पिचों पर भी खूब विकेट निकाले हैं और विदेशों में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। ऐसे में हमें सिर्फ नंबरों के आधार पर यह फैसला नहीं करना चाहिए।’

हमारे बोलरों ने किया साबित भारत में कारगर है फास्ट बोलिंग
नेहरा ने कहा कि भारतीय फास्ट बोलरों ने इस कहावत को झुठला दिया है कि भारतीय पिचों पर तेज गेंदबाज कभी कामयाब नहीं हो सकते उन्हें यहां ज्यादा विकेट नहीं मिल सकते। सच यह है कि भारतीय पिचें रिवर्स स्विंग के लिए मुफीद होती हैं और एसजी का गेंद और भी मददगार साबित होता है।

नेहरा ने कहा, ‘भारत के लिए यह बात जरूर खास है कि उसके खेमे में एक साथ ये सभी उम्दा फास्ट बोलर मौजूद हैं, जो मिलकर टीम की जीत में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी गेंदबाज पूरी तरह फिट भी हैं और अनुभवी भी हैं। तेज गेंदबाजों का ऐसा शानदार पूल विराट कोहली से पहले कभी भी किसी कप्तान को नहीं मिला। अब हमारे गेंदबाजों को सिर्फ हवा की मदद से ही पेस नहीं मिलती बल्कि वह सतह से भी पेस निकालने में कामयाब हो रहे हैं।’

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