विश्वकप इतिहास के ये हैं सबसे शानदार 7 खिलाड़ी

Asiaville

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Author 2019-09-17 15:57:54

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विश्वकप जैसे बड़े टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन का सपना हर खिलाड़ी संजोता है, लेकिन उसे अंजाम देना आसान नहीं होता. जो ऐसा कर जाते हैं, वो इतिहास के पन्नों में अपना नाम लिख जाते हैं. अगर प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट को पैमाना माने तो आप पाएंगे कि जिस दौर में एक से एक चमकते सितारों से क्रिकेट की दुनिया जगमगा रही थी, उसी दौर मुट्ठी भर खिलाड़ी चमके और आसमान में छा गए.

ग्लेन टर्नर, गैरी गिलमोर, गॉर्डन ग्रीनिज़, माइक हैंड्रिक, डेविड गॉवर, रोजर बिन्नी, ग्राहम गूच, क्रैग मैकडरमॉट वो खिलाड़ी हैं जो 1975-87 विश्वकप के दौरान अपने बेहतरीन प्रदर्शन की वजह से आज भी जाने जाते हैं. इन खिलाड़ियों का विश्वकप में गज़ब का प्रभाव था. लेकिन इनमें से किसी को भी प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट का खिताब नहीं मिला. वजह साफ़ है क्योंकि विश्वकप में पहली बार इस खिताब का शुरुआत ही 1992 में हुई.
ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि 1992 से 2015 तक हुए 7 विश्वकपों में वो कौन-कौन से खिलाड़ी थे, जिन्हें मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट के ख़िताब से नवाज़ा गया.

मार्टिन क्रो

1992 विश्वकप में ऐसे कई खिलाड़ी थे जिनका शानदार प्रदर्शन देखने को मिला. इनमे मार्टिन क्रो, जावेद मियांदाद, रमीज़ रज़ा, वसीम अक़रम,मेरिक प्रिंगल जैसे बेहतरीन खिलाड़ी अपने प्रदर्शन की वजह से जाने गए. लेकिन 1992 विश्वकप में मैन ऑफ़ द सीरीज़ रहे न्यूज़ीलैंड के पूर्व कप्तान और धाकड़ बल्लेबाज़ मार्टिन क्रो. इसके साथ ही मार्टिन क्रो इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ थे. मार्टिन ने 9 मैच में 456 रन बनाए थे. इस टूर्नामेंट में मार्टिन क्रो की बेहतरीन बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन विश्वकप के पहले ही मैच में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ देखने को मिली थी जब उन्होंने नाबाद 134 गेंद पर 100 रन की शानदार पारी खेली थी और न्यूज़ीलैंड ये मुक़ाबला जीता भी था.

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1992 विश्वकप में अपनी टीम की ओर से सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मार्टिन क्रो की वजह से न्यूज़ीलैंड की टीम टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंची थी.

सनथ जयसूर्या

1996 विश्वकप की चैंपियन श्रीलंका के सनथ जयसूर्या मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे. 1996 विश्वकप से पहले श्रीलंका को क्रिकेट जगत में गंभीरता से नहीं लिया जाता था. लेकिन, इस टूर्नामेंट ने विश्व क्रिकेट में श्रीलंका को अचानक सबसे आगे लाकर रख दिया. 1996 के विश्वकप में श्रीलंका ने अपना कोई भी मैच नहीं गंवाया और सभी मुक़ाबले जीतकर फाइनल में 1987 विश्वकप के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को मात देकर विश्वकप ख़िताब अपने नाम किया था.

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श्रीलंका की जीत में सनथ जयसूर्या का अहम योगदान था. जयसूर्या ने इस टूर्नामेंट में खेले गए 6 मैचों में 36.83 की औसत और 131.54 की स्ट्राइक रेट से 221 रन बनाए और 7 विकेट भी चटकाए थे. इस टूर्नामेंट में सनथ जयसूर्या का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन इंग्लैंड के ख़िलाफ़ देखने को मिला था जब उन्होंने 44 गेंद पर 82 रन की पारी खेली साथ ही दो विकेट भी चटकाए.

लांस क्लूज़नर

1999 के विश्वकप में दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउंडर लांस क्लूज़नर ने अपने प्रदर्शन से दक्षिण अफ्रीका को विश्वकप ख़िताब तो नहीं दिला सके, लेकिन मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट का ख़िताब उन्होंने अपने नाम किया. इस टूर्नामेंट में लांस क्लूज़नर के ऑलराउंड प्रदर्शन के ज़रिए दक्षिण अफ्रीका की टीम को सेमीफ़ानल तक पहुंचा दिया और सेमीफ़ाइनल में भी उन्होंने अकेले दम पर मैच लगभग जिता ही दिया था. एलन डोनाल्ड के रन आउट ने क्लूज़नर और दक्षिण अफ्रीका के सपनों पर पानी फेर दिया. ऑस्ट्रेलिया के साथ वो मैच टाई हो गया था.

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इस विश्वकप में लांस क्लूजनर ने 9 मैच में 281 रन बनाए जिसमें 2 अर्धशतक भी शामिल थे. इसके साथ ही क्लूजनर ने 17 विकेट भी चटकाए थे.

सचिन तेंदुलकर

2003 का विश्वकप भले ही भारत ने नहीं जीता हो, लेकिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे. इस विश्वकप में सचिन के बल्ले से रनों की बारिश हुई और उन्होंने विश्वकप में 673 रन बना डाले. ये रिकॉर्ड आज भी कोई नहीं तोड़ पाया है. इसके अलावा उन्होंने दो विकेट भी चटकाए. कई मैचों में उन्होंने किफ़ायती गेंदबाज़ी की.

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सचिन तेंदुलकर ने नामीबिया के ख़िलाफ़ बेहतरीन बल्लेबाज़ी करते हुए 152 रनों की पारी खेली थी. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 75 गेंदों में 98 रन की उनकी पारी को कौन भूल सकता है!

ग्लेन मैक्ग्रा

2007 विश्वकप में लगातार तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया चौंपियन बनी और इस बार ऑस्ट्रेलिया के महान गेंदबाज़ ग्लेन मैक्ग्रा मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे. मैक्ग्रा ने पूरे टूर्नामेंट में ज़बर्दस्त गेंदबाज़ी की. उन्होंने इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा 26 विकेट चटकाए. मैक्ग्रा ने सेमीफ़ाइनल में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ अहम मुक़ाबले में 3 विकेट चटकाए थे. इस मैच में उन्होंने प्लेयर ऑफ़ द मैच भी चुना गया.

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मैक्ग्रा का ये आख़िरी विश्वकप था. 1996 से लेकर 2007 तक उन्होंने चार विश्वकप खेले और इस दौरान 39 मैचों में उन्होंने 71 विकेट लिए है. उनका रिकॉर्ड आज भी कोई नहीं तोड़ पाया है. ग्लेन मैक्ग्रा लगातार तीन बार विश्वकप चैंपियन रही ऑस्ट्रेलिया का हिस्सा रहे.

युवराज सिंह

2011 में जब भारत ने दूसरी बार विश्वकप जीता तो युवराज सिंह सबसे बड़े स्टार के तौर पर सामने आए. इस टूर्नामेंट में युवराज सिंह ने अपनी बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी से तो कमाल किया ही, लेकिन उनकी फिल्डिंग से भी सबका ध्यान खींचा. 9 मैचों में युवराज सिंह के बल्ले से 362 रन निकले जिसमें 1 शतक और 4 अर्धशतक शामिल थे. इसके साथ ही उन्होंने 15 विकेट भी चटकाए. 2011 विश्वकप में युवराज सिंह ‘मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट’ रहे.

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इस टूर्नामेंट में युवराज भारत के संकट मोचक की भूमिका निभा रहे थे, उन्होंने हर उस मैच में भारत को जीत दिलाई जहां टीम लड़खड़ाने लगी. ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबले में युवराज सिंह के बेहतरीन प्रदर्शन को कौन भूल सकता है! अपना आख़िरी विश्वकप खेल रहे रिकी पॉन्टिंग ने शानदार शतक जड़ के भारत के सामने 260 रन का स्कोर खड़ा कर दिया. लेकिन जब मैच भारत के हाथ से जा रहा था तब ऐसे मौके पर युवराज सिंह ने टिककर खेला और मैच को भारत की झोली में डाल दिया. इतना ही नहीं इस मैच युवराज ने बल्ले के साथ-साथ गेंद से कमाल दिखाया उन्होंने 10 ओवर में 44 रन देकर 2 विकेट भी चटकाए.

मिचेल स्टार्क

2015 विश्वकप में न्यूज़ीलैंड को हराकर एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया ने विश्वकप ट्रॉफ़ी अपने नाम की. इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाई मिचेल स्टार्क ने और इसी वजह से उन्हें ‘मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट’ चुना गया. इस टूर्नामेंट में मिचेल स्टार्क 8 मैच में सबसे ज़्यादा 22 विकेट चटकाए. मिचेल स्टार्क का बेहतरीन प्रदर्शन ग्रुप मैच में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ देखने को मिला, जब उन्होंने 9 ओवर में सिर्फ 28 रन देकर 6 विकेट चटकाए थे.

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फ़ाइनल मुक़ाबले में भी मिचेल स्टार्क ने दो अहम विकेट चटकाए. उन्होंने न्यूज़ीलैंड के सलामी बल्लेबाज़ ब्रैडन मैकुलम को खाता भी नहीं खोलने दिया और पवेलियन का रास्ता दिखाया था.

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