वो क्रिकेटर नहीं, तूफान था. आता था, तबाही मचाता था, चला जाता था

KHEL KI DUNIYA

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Author 2019-10-02 17:18:15

1996 के सिंगर कप का फाइनल. श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच. श्रीलंका दूसरी पारी में बैटिंग कर रही थी. पहली 31 गेंदों में ही स्कोर-बोर्ड पर 70 रन टंग चुके थे. यहां पर पहला विकेट गिरा. रोमेश कालुवितरना आउट हो गए थे. जीरो रन बना के. जी हां, सही पढ़ा आपने. टीम के 70 रन के स्कोर पर जो एक ओपनिंग बैट्समैन आउट हुआ, उसका स्कोर ज़ीरो था. एक्स्ट्रा के 4 रन छोड़ के बाकी के सारे रन दूसरे बल्लेबाज़ ने बनाए थे.

वो विस्फोटक बल्लेबाज़ था सनथ जयसूर्या. वो खिलाड़ी, जिसने श्रीलंकाई क्रिकेट को अंडरडॉग्स से चैंपियंस तक का सफ़र करवाया.

वन डे क्रिकेट में तलवारबाज़ी की शुरुआत की

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क्रिकेट की दुनिया में टेस्ट क्रिकेट से अगला पड़ाव था एकदिवसीय मैच. पहले 60 और फिर 50 ओवर का खेल. टेस्ट के हैंग ओवर से बरसों तक आज़ाद न हो सका ये फॉर्मेट. सभी टीमों की ये रणनीति हुआ करती थी कि पहले नई बॉल को सावधानी से खेलकर उसका डंक निकाला जाए. विकेट बचाए जाएं. उसके बाद अंत में तेज़ी से रन बटोर कर अच्छा स्कोर खड़ा कर लें. लगभग इसी ढर्रे पर वन डे क्रिकेट बरसों तक चला.

फिर जयसूर्या आए. और उन्होंने इस गेम की दशा-दिशा ही बदल दी.

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इस बात पर आज यकीन करना मुश्किल है कि अपने करियर के शुरुआती 5-6 सालों तक जयसूर्या को एक बॉलर माना जाता था. ऐसा बॉलर जो थोड़ी बहुत बैटिंग भी कर लेता हो. ये तो बाद में खुला कि वो अद्भुत स्ट्रोक प्लेयर हैं.

वीरेंद्र सहवाग से पहले जिन गिने-चुने खिलाड़ियों का हैंड-आई को-ऑर्डिनेशन देखने लायक होता था, उनमें जयसूर्या टॉप 3 में आएंगे. खड़े-खड़े, बिना किसी फुटवर्क के गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचा देने में जो सहजता उन्हें हासिल थी, उसने उनके दुनियाभर में फैन बनाएं.

30 जून 1969 को पैदा हुए जयसूर्या के करियर के कुछ हाई पॉइंट्स पर नज़र डाल ली जाए.

डिविलियर्स, अफरीदी, वाटसन सबके रिकॉर्ड पहले जयसूर्या के नाम थे

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आज की तारीख में वन डे क्रिकेट में सबसे तेज़ 50, 100, 150 रन बनाने का रिकॉर्ड एबी डिविलियर्स के नाम है. लेकिन एक वक़्त था जब ये सभी जयसूर्या के नाम थे. और वो भी तब क्रिकेट के नियम इतने बैट्समैन-फ्रेंडली नहीं हुआ करते थे.

* 1996 में जयसूर्या ने 17 गेंदों में 50 रन मारे. पाकिस्तान के खिलाफ़. उससे पहले ऑस्ट्रेलिया के साइमन ओ डोनेल ने 18 गेंदों पर 50 रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया था जिसे आज के दिन जयसूर्या ने तोड़ा था. साइमन ने वो रिकॉर्ड श्रीलंका के ही खिलाफ साल 1989-90 में शारजाह में बनाया था. बाद में जयसूर्या के इस रिकॉर्ड को साउथ अफ्रीका के एबी डिविलियर्स ने 18 जनवरी 2015 को वेस्टइंडीज के खिलाफ 16 गेंदों पर 50 रन बनाकर तोड़ा है.

* उसी टूर्नामेंट में उन्होंने 48 गेंदों में शतक जड़ दिया. ये उस ज़माने में पहली घटना थी, जब किसी बल्लेबाज़ ने 50 से भी कम गेंदों में शतक लगाया हो. लेकिन 6 महीने बाद ही अफरीदी ने जयसूर्या से 11 कदम आगे जाते हुए सिर्फ 37 गेंदों में शतक ठोक दिया. सबसे मजे की बात ये है कि अपनी पारी में आफरीदी ने सबसे ज्यादा जयसूर्या की गेंदों की ही पिटाई की और उनके एक ओवर में 28 रन बना डाले थे.

इसके बाद एंडरसन ने 1 जनवरी 2014 को वेस्टइंडीज़ के खिलाफ क्वींसटाउन में सिर्फ 36 गेंदों में शतक जमाकर अफरीदी को पीछे छोड़ा। जहां अफरीदी के रिकॉर्ड को तोड़ने में किसी बल्लेबाज़ को 17 साल लग गए तो वहीं, कोरी एंडरसन का रिकॉर्ड करीब एक साल ही टिक सका।

18 जनवरी 2015 को मिस्टर 360 के नाम से मशहूर द. अफ्रीका के धुआंधार खिलाड़ी एबी डिविलियर्स ने कोरी एंडरसन के कीर्तिमान को भी तोड़ दिया। डीविलियर्स ने भी सबसे तेज़ शतक लगाने का रिकॉर्ड वेस्टइंडीज़ की टीम के खिलाफ ही बनाया। जोहान्सबर्ग में खेले गए इस मुकाबले में डिविलियर्स ने सिर्फ 31 गेंदों पर शतक जमाकर एंडरसन के रिकॉर्ड को धराशाई कर दिया।

* 2006 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ़ 95 गेंदों में 150 रन मारे. 2013 में इस रिकॉर्ड को शेन वाटसन ने अपने नाम कर लिया. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉटसन ने साल 2013 में मीरपुर में खेले गए एक वनडे मैच में बांग्लादेश के गेंदबाजों की बेतरतीब बखिया उधेड़ते हुए 150 रन महज 83 गेंदों में पूरे कर इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया. फिर 2015 के विश्व कप में डीविलियर्स ने सिडनी के मैदान पर 64 गेंदों में 150 रन ठोककर ये विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था।

जससूर्या की टॉप 3 पारियां

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1) 1996 वर्ल्ड कप का क्वार्टर फाइनल पाकिस्तान के फैसलाबाद में खेला गया। यह मैच श्रीलंका और इग्लैंड की टीमों के बीच खेला गया था। इंग्लैड ने पहले बैटिंग करते हुए 235 रन 8 विकेट गवां कर बनाए। श्रीलंका टीम की ओर से जयसूर्या और रोमेस ने ओपनिंग की। जयसूर्या ने इंग्लैड के स्पिनर्स को जम कर धोया। 30 बॉल्स में जयसूर्या ने अपना अर्द्धशतक पूरा किया। 44 गेंदों पर जयसूर्या ने 82 रनों की रोमांचक पारी खेली।इस तेज़ शुरुआत के बाद 236 रन का टार्गेट हासिल करना कोई कठिन काम नहीं था. श्रीलंका ने वो मैच जीता, अगले दो मैच भी, और कप पर कब्ज़ा कर लिया.

2) साल 2000 के कोका कोला चैम्पियंस ट्रॉफी के फाइनल में जयसूर्या द्वारा खेली गई 189 रनों की पारी कौन भूल सकता है। इस मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जीता और कप्तान जयसूर्या ने बल्लेबाजी करने का फैसला किया। श्रीलंका ने जयसूर्या के 189 रनों की मदद से निर्धारित 50 ओवर्स में 5 विकेट के नुकसान पर 299 रनों का स्कोर बनाया। उनकी यह पारी उस वक्त वनडे की सबसे बड़ी पारी थी। श्रीलंका ने इस मुकाबले में भारत को सिर्फ 54 रन पर ऑल आउट कर दिया और मुकाबला 245 रनों से जीतते हुए खिताब पर भी कब्जा जमा लिया। भारत का यह स्कोर वनडे में अब तक का सबसे न्यूनतम स्कोर है।

3) साल 1997 में भारत श्रीलंका के दौरे पर गया था। दोनों देशों के बीच पहला टेस्ट मैच कोलंबो में खेला गया, जिसमें भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मैच के दूसरे दिन अपनी पहली पारी 537/8 पर घोषित की। मैच के दूसरे दिन स्टंप्स तक भारत ने श्रीलंका का 39 रन पर 1 विकेट भी झटक लिया। टेस्ट मैच के तीसरे दिन से सनथ जयसूर्या और रोशन महानामा के बीच शुरू हुई मैराथन साझेदारी। अगले दो दिनों तक भारतीय गेंदबाजों को कोई विकेट नहीं मिला। इन दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 576 रनों की साझेदारी हुई, जो उस समय टेस्ट क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी साझेदारी हुई।

जयसूर्या ने इस मैच में तिहरा शतक ठोकते हुए 340 (36x4, 2x6, 578 गेंदें, 799 मिनट) रन बनाए। रोशन महानामा ने उनका साथ निभाते हुए 225 (27x4, 561 गेंदें, 753 मिनट) रन बनाए और टेस्ट मैच के पांचवें दिन अनिल कुंबले की गेंद पर पगबाधा आउट होकर पवेलियन लौटे। श्रीलंका ने अपनी पहली पारी 952/6 के स्कोर पर घोषित​ किया, जो टेस्ट क्रिकेट की एक पारी में सर्वाधिक रनों का विश्व रिकॉर्ड है।

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सनथ जयसूर्या अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं इस धरती पर, जिन्होंने वन डे क्रिकेट में 10,000 से ज़्यादा रन बनाए हैं और 300 से ज़्यादा विकेट लिए हैं. एग्जैक्ट बताया जाए तो जयसूर्या ने 445 वनडे मैच में उन्होंने 13,430 रन बनाए, जिसमें 28 शतक और 68 अर्धशतक शामिल हैं। गेंदबाजी की बात करें तो खिलाड़ी ने टेस्ट में 98 तो वनडे में 323 विकेट झटके।

आज भी जयसूर्या की क्रिकेटिंग पारी को लोग ये कह कर याद करते हैं, “वो क्रिकेटर नहीं, तूफ़ान था. आता था, तबाही मचाता था, चला जाता था.”


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