शह और मात का खेल : सौरव गांगुली बनाम रवि शास्त्री

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Author 2019-10-18 12:44:02

फिल्म वक्त का एक गीत था, जिसके बोल में था. आदमी को चाहिए वक्त से डरकर रहे, कौन जाने किस घड़ी वक्त का बदले मिजाज वक्त से दिन और रात। इस गीत को आप भारतीय क्रिकेट से जोड़कर देखेंगे तो कुछ-कुछ समझ में आएगा। ऐसा लगता है कि 23 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से जब सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष पद की कुर्सी पर बैठेंगे वैसे ही गांगुली बनाम रवि शास्त्री में शह और मात का खेल शुरू हो जाएगा।

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पूरी दुनिया जानती है कि सौरव गांगुली और रवि शास्त्री एक दूसरे को पसंद नहीं करते हैं। जब जिसका दांव चल जाता है, उसका सिक्का चलने लगा है। रवि शास्त्री 1981 से लेकर 1992 तक भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे तो सौरव गांगुली का भारतीय क्रिकेट के साथ सफर 1996 से 2008 तक रहा। यानी गांगुली 13 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे, जबकि शास्त्री 12 साल तक टीम इंडिया के खिलाड़ी रहे।

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वहीं, एक बार एक टॉक शो में भी शास्त्री ने गांगुली के बारे में एक विवादित बयान दिया था। इसके बाद दोनों के बीच में तल्खी किसी से भी छुपी नहीं थी। अब जब गांगुली बीसीसीआइ अध्यक्ष बनने जा रहे हैं तो शास्त्री के लिए मुश्किल खड़ी होना तय है।

शास्त्री ने दिया था विवादित बयान

एक टॉक शो में टीम इंडिया के मुख्य कोच शास्त्री ने कहा था कि मुझे समय की पाबंदी पसंद है। मैं इससे कभी समझौता नहीं करता हूं। मुझे लगता है कि यह एक आदत है। एक बार 2007 में बांग्लादेश दौरे पर मैं टीम इंडिया का मैनेजर था। हम सभी बस में बैठे थे और गांगुली ने देर कर दी। तब हम उन्हें छोड़कर चले गए थे। अगर मुझे नौ बजे बस लेकर निकलना है तो मैं नौ बजे ही निकलूंगा।

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तब गांगुली ने इसका जवाब दिया था कि आप शास्त्री का सुबह इंटरव्यू नहीं कर सकते हो। आप उन्हें ब्रेकफास्ट शो पर मत बुलाइए क्योंकि उन्हें याद नहीं रहता है वह क्या कहते हैं। जब मैं उनसे मिला तो मैं उनसे पूछूंगा कि आपने क्या कहा। मुझे लगता है कि ऐसा कभी हुआ ही नहीं था, लेकिन अच्छा यही है कि उनका सुबह की जगह शाम में इंटरव्यू किया जाए क्योंकि वह तब सभी बात याद रख पाएंगे।

गांगुली-शास्त्री में मतभेद जगजाहिर है

टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री और बीसीसीआई के नए अध्यक्ष बनने जा रहे सौरव गांगुली के मतभेद की कहानी जगजाहिर है. 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कोच रहे अनिल कुंबले और कप्तान विराट कोहली के बीच हुए मतभेद के बाद कुंबले ने कोच पद से इस्तीफा दे दिया था.

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इसके बाद कोहली ने शास्त्री को कोच बनाने की मांग की थी, जिसके पक्ष में गांगुली नहीं थे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित प्रशासकों की समिति और सचिन तेंदुलकर के कारण सौरव गांगुली को पीछे हटना पड़ा था. वैसे सौरव गांगुली कई मौके पर शास्त्री के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं.

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अब नहीं चलेगा एकछत्र राज

कोहली और शास्त्री टी-20 विश्व कप की तैयारियों के लिए अपने नियमित अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाडि़यों की जगह युवाओं को लगातार मौका दे रहे हैं। टीम में कुछ भी गलत हो रहा हो कोहली और शास्त्री ने एक लय में उसका समर्थन किया। फिर चाहे वह विदेशी टेस्ट दौरों पर खराब निर्णय हो या फिर विश्व कप में विजय शंकर जैसे खिलाड़ी का गलत चयन। अब गांगुली के अध्यक्ष बनने से इन एकतरफा फैसलों पर लगाम लगेगी।

सेलेक्शन मीटिंग में रवि शास्त्री की नो एंट्री

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली जल्द अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं. गांगुली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के नए अध्यक्ष के रूप में 23 अक्टूबर को कार्यभार संभालने वाले हैं. हालांकि इससे पहले गांगुली ने लोढ़ा कमेटी की सिफारिश के मद्देनजर साफ कर दिया है कि टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री अब सेलेक्शन कमिटी की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे.

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बांग्लादेश सीरीज के लिए टीम इंडिया का सेलेक्शन 21 अक्टूबर को होना था, लेकिन इसके डेट में बदलाव किया गया है. अब टीम का चयन 24 अक्टूबर को होगा. वहीं, 23 अक्टूबर को सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष पद की कुर्सी संभाल लेंगे. हालांकि वो सेलेक्शन कमेटी के बैठक में हिस्सा नहीं ले सकते हैं, ऐसे में वो बैठक से पहले सेलेक्शन कमेटी के सदस्यों से बातचीत कर सकते हैं.

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रवि शास्त्री का परफॉर्मेंस

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