शायरियां: शिकवे तो सभी को हैं जिन्दगी से साहब

Ritu bhardwaj

Ritu bhardwaj

Author 2019-11-01 01:39:10

अब कहूँ क्या मैं आज की दुनिया में भला किसी का एहसान कौन याद रखता है,

सभी अपना-अपना कहकर मिटे जा रहे हैं दूसरे के लिए फरियाद कौन करता है।

अब तो बस बोलने का चंद लम्हा मिले तो मुंह से न जाने क्या-क्या बोल जाते हैं लोग,

जरा सा वक्त मिले तो किसी को बुराई की हद तक बुरा बोलने में कौन आबाद रखता है।

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मेरी वफ़ा की कदर ना की

अपनी पसंद पे तो ऐतबार किया होता

सुना है वो उसकी भी ना हुई

मुझे छोड दिया था उसे तो अपना लिया होता.

बेवफा तो वो खुद थी पर इलज़ाम किसी और को देती थी

पहेले नाम था मेरा उसके होटों पर अब वोह नाम किसी और का लेती है।

कभी लेती थी वादा मुझ से साथ छोड़ने का

अब यही वादा किसी और से लेती है।।

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तालीमें नहीं दी जाती परिंदों को उड़ानों की

वे खुद ही तय करते है, ऊँचाई आसमानों की

रखते हैं जो हौसला आसमां को छूने का

वो नहीं करते परवाह जमीन पे गिर जाने की.

छू ले आसमान, जमीन की तलाश ना कर

जी ले जिंदगी, ख़ुशी की तलाश ना कर

तकदीर बदल जाएगी खुद ही मेरे दोस्त

मुस्कुराना सीख ले, वजह की तलाश ना कर.

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खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते है

धुआं बनकर पर्वतों से उड़ा करते है

ये कैंचियाँ खाक हमें उड़ने से रोकेगी

हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते है.

मंजिल उन्ही को मिलती है

जिनके सपनो में जान होती है

पंख से कुछ नहीं होता

हौसलो से उड़ान होती है.

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