संस्कारशाला: हार के आगे जीत है

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Author 2019-09-25 23:18:25

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बिजनौर, जेएनएन।

है पर्वत ऊंचे है तो क्या डर, तू चढ़ने की कोशिश तो कर, यूं सोच-सोच कर आज जी तू, मरने से पहले न मर, होता है नाम उन्हीं का जग में, जो सबसे अलग कुछ कर जाए, मेहनत की कलम से जग में वो, इतिहास नया एक रच जाए, उनका ही जीवन धन्य है जिनके, मन में विजय का गीत है, ज्ञान यही है जीवन का कि हार के आगे जीत है। नीचे तो धरती है, पर ऊपर का कोई अंत नहीं, सबसे पीछे हार है आगे जीत का कोई अंत नहीं, अमावस्या की रात में भी चांद की चमक दिखाना, हार के आगे जीत है, साथी हार से मत घबराना।

हार के आगे जीत है यह तो हम सभी सुनते है, लेकिन यह भी कुछ लोग हार की वजह से कुछ कर नहीं पाते। हार का डर किसी भी व्यक्ति पर जब तक हावी होता है, तो वह चाह कर भी कोई निर्णय नहीं ले पाता है। किसी व्यक्ति को इंटरव्यू देने जाना है। किसी को परीक्षा देने, किसी को कुछ नया करने का अवसर तो किसी को अपना हुनर दिखाने का मौका मिला है, लेकिन जब मन में हार का डर हावी हो जाए, तो यह आपको अवसर का लाभ नहीं उठाने देता। जरा सोचिए कि आप किस बात से डरते है। क्या होगा?, मैं नहीं कर पाया तो?, लेकिन ऐसा सोचना हमारे आत्मविश्वास की कमी के कारण होता है। जरा सोचते है कि आप जीवन के बने बनाए सीधे रास्ते पर चल रहे है या फिर आपको कुछ नया करने का अवसर मिलता है। तो आप क्या सोचते है कि यहां तो इतना आरामदायक है, तो वहां पता नहीं कैसा होगा। तो मैं वहां क्यों जांऊ। बस यहीं आपके सीमित रहने का दायरा आपको आगे कभी बढ़ने नहीं देता है। इसी लिए सबसे पहले अपने मन से हार के डर को दूर भगाकर ही हम कुछ नया कर सकते है। क्योंकि हार के बाद ही जीत है। हम बार-बार गिरकर उठने से ही मजबूती से चलना सीखते है। हमारी असफलता ही हमें सफलता की ओर ले जाती है। जब हम सफलता के रास्ते पर चलते है तो हार या जीत मिलती है। यदि जीतते है तो दुनिया सलाम करती है। यदि हारते है तो जीतने सबक मिलता है। एक कहावत है कि जो डर गया सो मर गया। हार और जीत जीवन का एक हिस्सा है। इसलिए पूरे आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। हार हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। ट्रमैन कैपोट ने अपनी सुंदर पक्तियों में कही कि असफलता वह मसाला है जो सफलता का स्वाद देता है। क्या हम हार व गलतियों की वजह से कुछ नया करना छोड़ दें। नहीं गलतियां उन्हीं से होती है, जो कुछ नया करने की कोशिश करते है। हार व गलतियां ही हमें बार-बार जीत के लिए प्रेरित करती है। किसी ने सही ही कहा है कि जो हारता है वही जीतने का महत्व जानता है। यदि हम अपने मन की हार पर काबू पा लेते है, तो जीवन के कठिन से कठिन लक्ष्य को प्राप्त कर दुनिया को जीत सकते है। हमारे मन का साहस व आत्मविश्वास ही हमारे मन की हार को दूर करता है। जीवन में ऊंचे लक्ष्य की ओर जाने के लिए प्रेरित करता है। दूसरे शब्दों में कहे तो कामयाबी के पीछे भागने से बेहतर है कि हम काबिल बनकर हार को जीत कर सफलता प्राप्त करें। सही मायने में हम सफल ही तब होते है। हार को अपने मन से बाहर निकाल देते है। जीवन में मरना तो सबको है, फिर हम डर-डर कर क्यों जीएं। हमें अपनी मंजिलों को पाने के लिए असफलताओं को भूलाकर सफलता की ओर आगे बढ़ना है। क्योंकि गलतियां व हार ही हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

लहरों के डर से नौका कभी पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। लोग क्या कहेंगे। क्या सोंचेगे। ऐसे ही डर से दूर होकर अपने जीवन के उच्च लक्ष्य को आगे बढ़कर प्राप्त करना चाहिए। जीवन में सभी लोग सफल होना चाहते है, लेकिन सफल वहीं लोग होते है, जो अपने मन से हार के डर को निकल कर पूर्व आत्मविश्वास व साहस के द्वारा दिन रात मेहनत कर दुनिया को मुट्ठी में कर लेते है।

डा. सरजीत सिंह, प्रधानाचार्य, एएन इंटरनेशनल स्कूल बिजनौर।

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