हंसी से संभव है दीर्घायु भी

Royal Bulletin

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Author 2019-09-22 18:00:00

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हंसी से न केवल रोग-मुक्ति तथा अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति संभव है अपितु अधिक हँसने वाले व्यक्ति अपेक्षाकृत दीर्घायु भी होते हैं और इस तथ्य की पुष्टि होती है आधुनिक वैज्ञानिक शोधों से।

अभी हाल ही में वैज्ञानिकों ने कुछ बेसबॉल खिलाडिय़ों की उनकी हंसी के आधार पर रैंकिंग की। कुछ खिलाड़ी ऐसे थे जो ख़ूब हंसते थे और जी खोलकर हंसते थे जबकि कुछ खिलाड़ी ऐसे थे जो कभी-कभार हंसते थे लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे भी थे जो बिलकुल नहीं हंसते थे।

उनकी जीवनावधि का अध्ययन करने पर चौंका देने वाले तथ्य सामने आए। जो खिलाड़ी बिलकुल नहीं हँसते थे उनकी औसत आयु 72.9 वर्ष रही जबकि जो खिलाड़ी ख़ूब हंसते थे, उनकी औसत आयु 79.9 वर्ष पाई गई। कम हंसने वाले खिलाडिय़ों की औसत आयु इन दोनों के बीच की अर्थात् 75 वर्ष के लगभग रही। इससे सिद्ध होता है कि हँसना हमारे लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। जितना ज़्यादा हंसेंगे, उतनी ही लंबी उम्र पा सकेंगे और वो भी अच्छे स्वास्थ्य के साथ।

हास्य से समय की सीमा मिट सी जाती है। हंसते-हंसते कब और कैसे समय बीत जाता है पता ही नहीं चलता। दिन घंटों में और घंटे मिनटों में गुजऱते प्रतीत होते हैं। एक बार की बात है कि पिंजौर से दिल्ली आ रहे थे। बस में सभी यात्री एक दूसरे से परिचित थे। हंसी-मज़ाक का ऐसा दौर चला कि समय का पता ही नहीं चला।

मेरी चाय पीने की इच्छा हो रही थी। मैंने अपने सहयात्रियों से कहा कि भाई कहीं बस रुकवाकर चाय-वाय तो पिलवा दो तो एक सहयात्री ने कहा, 'सिर्फ दस मिनट और रुको फिर आराम से पीना चाय।'

मेरा अनुमान था कि कम से कम आधा सफर तो अवश्य तय हो चुका होगा। दस मिनट बाद जब बस रुकी तो मुझे यह देखकर बड़ी हैरानी हुई कि हम दिल्ली में हैं। यह हास्य का ही प्रभाव था कि समय के गुजऱने का आभास नहीं हुआ।

- सीताराम गुप्ता

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